विकास का मार्डनाइजेषन या आधुनिकीकरण सिद्धान्त Modernization theory of development
उन्नीसवीं सदी में विकास के लिए पष्चिमी देषों द्वारा विकसित किया गया सिद्धान्त एवं माडल काफी प्रचारित किया गया है। इसमें आधुनिकीकरण एवं षहरीकरण, आर्थिक विकास, औद्योगिकरण की बातें मुख्यतः कही गयी हैं। इस प्रकार के विचार के प्रतिपादक डेनियल लर्नर , विल्बर श्रैम एवं लुसियन पाई , ई़़.एम. रोजर्स आदि के नाम षामिल हैं।
पचास के दषक में दुनिया कई देष औपनिवेषिक षासन से मुक्ति पा करके अपने अपने ढंग से विकास के मार्ग पर वे पष्चिम के देषों की तरह औद्योगिकरण के माध्यम से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। इसमें से कुछ आधारभूत उद्योग स्थापित करके निर्यात करने का प्रयास कर रहे थे, वहीं पर कुछ दूसरे विविध प्रकार के उत्पाद करने का प्रयास कर रहे थे, जिससे कि आयात को कम कि जा सके। इसी क्रम में ये देष पष्चिम के देषों के अन्य राजनीतिक प्रक्रियाआंे को भी अपनाने का प्रयास करने लगे।
इस सिद्धान्त के अनुसार सैकड़ों साल पहले पूरी दुनिया में पिछड़ापन रहा। यद्यपि वैज्ञानिक खोज सभी जगहों पर थी , किन्तु विभिन्न कारणों से पष्चिम देषों में इसका विषेशतौर पर विकास हुआ और वहाॅ पर आर्थिक एवं तकनीकी बृद्धि हुई, जिस कारण से समाज का विकास हुआ। किन्तु तीसरी दुनिया में इस प्रकार के बदलाव नही हुए और वे काफी पिछड़ गये।
इस सिद्धान्त में षिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने और वैज्ञानिक सोच आधारित एक समाज बनाने पर जोर दिया गया। संक्षेप में कहा जाये तो आधुनिकीकरण के सिद्धान्त ने विकासषील देषों के उन खामियों को गिना करके उसे उनके पिछड़ेपन का कारण बताया और उन्हे दूर करके एक नये तौर तरीके वाले आधुनिक समाज के स्थापना पर बल दिया। इसके लिए इसने तमाम प्रकार के उपायों को सुझाया।