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      Home Media Study Material

      Photo editing फोटो संपादन

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      3 years ago
      in Media Study Material, Photography
      0

      Photo Editing help in making correction in photo .This article discusses some important aspects of it. फोटो सम्पादन


      PHOTO EDITING फोटो एडिटिंग — अर्थ, महत्व, प्रकार और सावधानियाँ

      (Photo Editing – Meaning, Importance, Types and Precautions)

      Photo Editing सामग्री-सूची (Table of Contents)

      1. प्रस्तावना (Introduction)
      2. फोटो एडिटिंग का अर्थ (Meaning of Photo Editing)
      3. फोटो एडिटिंग का महत्व (Importance of Photo Editing)
         3.1 दृश्य गुणवत्ता बढ़ाना (Enhancing Visual Quality)
         3.2 संदेश की स्पष्टता (Clarity of Message)
         3.3 सौंदर्य और कलात्मकता बढ़ाना (Aesthetic Enhancement)
         3.4 विज्ञापन और मार्केटिंग में प्रभाव (Advertising and Marketing Impact)
         3.5 वास्तविकता और कल्पना का संयोजन (Combining Reality and Imagination)
         3.6 पत्रकारिता में प्रामाणिकता और सटीकता (Accuracy in Photojournalism)
         3.7 सोशल मीडिया और डिजिटल ब्रांडिंग (Social Media and Digital Branding)
         3.8 पुरानी या क्षतिग्रस्त तस्वीरों की मरम्मत (Restoration of Old Photos)
         3.9 भावनात्मक प्रभाव बढ़ाना (Enhancing Emotional Impact)
         3.10 पेशेवर पहचान और कैरियर विकास (Professional Growth and Career Identity)
      4. फोटो एडिटिंग के प्रकार (Kinds / Types of Photo Editing)
         4.1 बेसिक एडिटिंग (Basic Editing)
         4.2 कलर करेक्शन (Color Correction)
         4.3 रिटचिंग (Retouching)
         4.4 मैनिपुलेशन एडिटिंग (Manipulation Editing)
         4.5 हाई डायनामिक रेंज एडिटिंग (HDR Editing)
         4.6 बैकग्राउंड एडिटिंग (Background Editing)
         4.7 फिल्टर और इफेक्ट एडिटिंग (Filters and Effects Editing)
         4.8 रेस्टोरेशन एडिटिंग (Restoration Editing)
         4.9 क्रिएटिव एडिटिंग (Creative Editing)
         4.10 फोटो कंपोजिटिंग (Photo Compositing)
      5. फोटो एडिटिंग में उपयोग होने वाले प्रमुख सॉफ़्टवेयर (Major Software Used in Photo Editing)
      6. एडिटिंग करते समय सावधानियाँ (Precautions While Editing)
      7. निष्कर्ष (Conclusion)

      1. प्रस्तावना (Introduction) Camera Tripod camera mode camera operation

      आधुनिक युग में फोटोग्राफी केवल कला नहीं रही, बल्कि यह संचार, सूचना और पहचान का सबसे सशक्त माध्यम  बन चुकी है। हर व्यक्ति अपने मोबाइल कैमरे से तस्वीरें खींचता है और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करता है। लेकिन हर फोटो अपने मूल रूप में पूर्ण नहीं होती — कभी उसमें रोशनी कम होती है, कभी रंग फीके होते हैं, तो कभी पृष्ठभूमि अव्यवस्थित। यहीं से शुरू होती है फोटो एडिटिंग (Photo Editing) की भूमिका — जो एक साधारण फोटो को आकर्षक, जीवंत और प्रभावशाली बनाती है। फोटो एडिटिंग केवल तस्वीर को सुंदर बनाना नहीं है; बल्कि यह दृश्य भाषा (Visual Language) को निखारने की प्रक्रिया है। जैसे लेखक शब्दों से अभिव्यक्ति करता है, वैसे ही फोटोग्राफर एडिटिंग के माध्यम से दृश्य को अर्थपूर्ण बनाता है। पत्रकारिता, विज्ञापन, शिक्षा, विवाह-फोटोग्राफी, ई-कॉमर्स, फैशन, सिनेमा और सोशल मीडिया — हर क्षेत्र में एडिटिंग एक आवश्यक कौशल बन चुकी है।


      2. फोटो एडिटिंग का अर्थ (Meaning of Photo Editing)

      फोटो एडिटिंग का सीधा अर्थ है — किसी तस्वीर में ऐसे परिवर्तन करना जिससे उसकी दृश्य गुणवत्ता (Visual Quality), संदेश की स्पष्टता (Message Clarity) और कलात्मकता (Aesthetics) बढ़ जाए। यह परिवर्तन कई स्तरों पर किए जाते हैं — जैसे:

      • तकनीकी सुधार (Technical Adjustments): ब्राइटनेस, कॉन्ट्रास्ट, कलर बैलेंस, शार्पनेस आदि को ठीक करना।
      • सौंदर्य सुधार (Aesthetic Enhancements): रंगों, प्रकाश और मूड को भावनात्मक रूप देना।
      • रचनात्मक परिवर्तन (Creative Alterations): कल्पना के आधार पर फोटो को नया रूप देना, जैसे किसी आकाश में सूर्यास्त जोड़ना या बैकग्राउंड बदलना।

      सरल शब्दों में —

      “फोटो एडिटिंग वह प्रक्रिया है जिसमें किसी छवि को उसकी वास्तविकता से बेहतर, सुंदर और उद्देश्यपूर्ण बनाया जाता है।”

      आज Adobe Photoshop, Lightroom, Canva, Snapseed, Pixlr, PicsArt जैसे सॉफ्टवेयर ने एडिटिंग को हर व्यक्ति की पहुंच में ला दिया है।

      3. फोटो एडिटिंग का महत्व (Importance of Photo Editing)

      फोटो एडिटिंग का महत्व केवल सुंदरता तक सीमित नहीं है। यह संदेश, विश्वसनीयता और दर्शक के अनुभव को प्रभावित करती है। नीचे इसके 10 प्रमुख कारण विस्तार से दिए गए हैं —

      (1) दृश्य गुणवत्ता बढ़ाना (Enhancing Visual Quality)

      फोटो की पहली पहचान उसकी दृश्य अपील (Visual Appeal) होती है। एडिटिंग से धुंधले, फीके या कम रोशनी वाले फोटो को चमकदार और स्पष्ट बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए — एक बादलों वाले दिन खींची गई फोटो में एडिटिंग द्वारा रोशनी और कंट्रास्ट बढ़ाकर उसे जीवंत बनाया जा सकता है। यह न केवल देखने में सुंदर बनती है बल्कि विषय को स्पष्ट रूप से उभारती है।

      (2) संदेश की स्पष्टता (Clarity of Message)

      एक फोटो केवल दृश्य नहीं होती — वह संदेश देती है। कभी-कभी फोटो में कई वस्तुएँ होती हैं जिससे मुख्य विषय छिप जाता है। एडिटिंग द्वारा अनावश्यक हिस्से क्रॉप किए जाते हैं और फोकस वहीं रखा जाता है जहाँ संदेश निहित है। उदाहरण के लिए, पत्रकारिता की तस्वीर में केवल घटना का मुख्य भाग दिखाकर समाचार की गंभीरता बढ़ाई जा सकती है।

      (3) सौंदर्य और कलात्मकता बढ़ाना (Aesthetic Enhancement)

      फोटो एक कला है। एडिटिंग इस कला को पूर्णता देती है। रंग संयोजन, प्रकाश और छाया का संतुलन, और टोनिंग द्वारा फोटो में भावनात्मक स्पर्श जोड़ा जाता है। फोटो को केवल दृश्य नहीं, बल्कि अनुभूति में बदला जा सकता है। जैसे किसी बच्चे की मुस्कान को हल्की रोशनी और गर्म टोन से और भी भावनात्मक बनाया जा सकता है।


      (4) विज्ञापन और मार्केटिंग में प्रभाव (Advertising and Marketing Impact)

      विज्ञापन का मूल सिद्धांत है — पहली नज़र का प्रभाव। एडिटिंग के माध्यम से उत्पाद को ऐसा दिखाया जाता है कि वह उपभोक्ता के मन में तुरंत जगह बना ले। उदाहरण के लिए, किसी खाद्य उत्पाद की फोटो में रंग, चमक और प्रस्तुति को आकर्षक बनाना विज्ञापन का प्रभाव बढ़ाता है। इसलिए ब्रांड इमेज बिल्डिंग में एडिटिंग अनिवार्य है।

      (5) वास्तविकता और कल्पना का संयोजन (Combining Reality and Imagination)

      एडिटिंग फोटोग्राफर की कल्पना को मूर्त रूप देती है। उदाहरण के लिए, पहाड़ की तस्वीर में सूर्यास्त जोड़ना या किसी मॉडल के पीछे आर्टिफिशियल बैकग्राउंड लगाना। इससे फोटो न केवल सुंदर बनती है, बल्कि रचनात्मक भी। इस प्रकार एडिटिंग वास्तविकता और कल्पना के बीच पुल का कार्य करती है।

      (6) पत्रकारिता में प्रामाणिकता और सटीकता (Accuracy in Photojournalism)

      पत्रकारिता में एडिटिंग का उपयोग केवल स्पष्टता और संतुलन के लिए किया जाता है, न कि गलत सूचना देने के लिए। जैसे कि किसी समाचार घटना की फोटो में केवल कंट्रास्ट और ब्राइटनेस बढ़ाकर दृश्य को साफ दिखाया जा सकता है। परंतु किसी भी वस्तु या व्यक्ति को जोड़ना या हटाना नैतिक रूप से गलत है। इसलिए एडिटिंग पत्रकारिता में सटीकता और विश्वसनीयता दोनों बनाए रखती है।

      (7) सोशल मीडिया और डिजिटल ब्रांडिंग (Social Media and Digital Branding)

      आज हर व्यक्ति की ऑनलाइन पहचान उसकी तस्वीरों से बनती है। एक अच्छी एडिटेड प्रोफाइल फोटो या ब्रांड पोस्ट दर्शकों को प्रभावित करती है। Instagram, YouTube, और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर एडिटिंग आपके डिजिटल पर्सनालिटी वैल्यू को बढ़ाती है।

      (8) पुरानी या क्षतिग्रस्त तस्वीरों की मरम्मत (Restoration of Old Photos)

      पुरानी यादों को डिजिटल रूप में पुनर्जीवित करने के लिए एडिटिंग एक वरदान है। फटी हुई, धुंधली या फीकी तस्वीरों को रेस्टोरेशन एडिटिंग द्वारा साफ और रंगीन बनाया जा सकता है। यह परिवारिक इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में उपयोगी है।

      (9) भावनात्मक प्रभाव बढ़ाना (Enhancing Emotional Impact)

      फोटो में भावनाएँ जोड़ना एक कला है। उचित रंग टोन और प्रकाश व्यवस्था दर्शक के मन में विशेष मूड उत्पन्न करती है। उदाहरण के लिए, ठंडी नीली रोशनी उदासी या शांति का भाव देती है, जबकि सुनहरी रोशनी आनंद और गर्माहट का प्रतीक होती है।

      (10) पेशेवर पहचान और कैरियर विकास (Professional Growth and Career Identity)

      आज एडिटिंग कौशल (Editing Skill) किसी भी फोटोग्राफर, ग्राफिक डिज़ाइनर या सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के लिए अनिवार्य है। जो व्यक्ति एडिटिंग में निपुण है, वह अपनी तस्वीरों के माध्यम से खुद को अलग पहचान दे सकता है। यह नौकरी, फ्रीलांस प्रोजेक्ट और ऑनलाइन पोर्टफोलियो में कैरियर के अवसर बढ़ाता है।

      4. फोटो एडिटिंग के प्रकार (Kinds / Types of Photo Editing)

      फोटो एडिटिंग के कई प्रकार हैं, जो उद्देश्य और तकनीक के अनुसार विभाजित किए जाते हैं —

      (1) बेसिक एडिटिंग (Basic Editing)

      यह एडिटिंग का पहला चरण है। इसमें फोटो की ब्राइटनेस, कॉन्ट्रास्ट, शार्पनेस, क्रॉपिंग और सैचुरेशन को समायोजित किया जाता है। उदाहरण के लिए, मोबाइल से खींची गई फोटो में चेहरे पर छाया आ जाए, तो एडिटिंग से उसे ठीक किया जा सकता है।

      (2) कलर करेक्शन (Color Correction)

      कभी-कभी फोटो में रंग प्राकृतिक नहीं लगते। इस स्थिति में व्हाइट बैलेंस और कलर टोन ठीक करके फोटो को वास्तविक रंगों में लाया जाता है। यह विशेष रूप से फैशन और प्रोडक्ट फोटोग्राफी में आवश्यक है।

      (3) रिटचिंग (Retouching)

      पोर्ट्रेट फोटोग्राफी में चेहरे के दाग-धब्बे, झुर्रियाँ, या स्किन टोन सुधारने के लिए रिटचिंग की जाती है।
      यह एडिटिंग फोटो को पेशेवर और आकर्षक बनाती है।

      (4) मैनिपुलेशन एडिटिंग (Manipulation Editing)

      इसमें कई तस्वीरों को जोड़कर नया दृश्य तैयार किया जाता है। जैसे किसी मॉडल को समुद्र के किनारे दिखाना जबकि शूट स्टूडियो में हुआ हो। यह एडिटिंग रचनात्मकता का सर्वोच्च रूप है।

      (5) हाई डायनामिक रेंज (HDR Editing)

      HDR एडिटिंग में फोटो के उजले और अंधेरे दोनों भागों में संतुलन लाया जाता है ताकि हर डिटेल साफ दिखाई दे। यह लैंडस्केप फोटोग्राफी में बहुत लोकप्रिय है।

      (6) बैकग्राउंड एडिटिंग (Background Editing)

      मुख्य विषय को उभारने के लिए पृष्ठभूमि को हटाना, बदलना या ब्लर करना शामिल है। ई-कॉमर्स प्रोडक्ट फोटो में इसका बहुत उपयोग होता है।

      (7) फिल्टर और इफेक्ट एडिटिंग (Filters and Effects Editing)

      फोटो में मूड और थीम जोड़ने के लिए फिल्टर लगाए जाते हैं। उदाहरण: ब्लैक एंड व्हाइट फिल्टर से क्लासिक प्रभाव, जबकि विंटेज फिल्टर से पुरानी यादों का एहसास दिया जा सकता है।

      (8) रेस्टोरेशन एडिटिंग (Restoration Editing)

      पुरानी, फटी या फीकी तस्वीरों को डिजिटल रूप से ठीक करना इस श्रेणी में आता है।
      यह एडिटिंग ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के पुनर्स्थापन में भी प्रयोग होती है।

      (9) क्रिएटिव एडिटिंग (Creative Editing)

      कल्पना और कला के मिश्रण से बनाई गई एडिटिंग। जैसे किसी व्यक्ति को अंतरिक्ष में दिखाना या किसी फूल को मानवीय भाव देना।

      (10) फोटो कंपोजिटिंग (Photo Compositing)

      दो या अधिक तस्वीरों को जोड़कर एक ही फ्रेम में नया दृश्य बनाना। यह तकनीक पोस्टर डिजाइन और सिनेमैटिक एडिटिंग में बहुत लोकप्रिय है।

      5. फोटो एडिटिंग में उपयोग होने वाले प्रमुख सॉफ़्टवेयर (Major Software Used in Photo Editing)

      1. Adobe Photoshop – सबसे उन्नत और पेशेवर एडिटिंग टूल।
      2. Adobe Lightroom – बैच एडिटिंग और कलर करेक्शन के लिए प्रसिद्ध।
      3. Canva – सोशल मीडिया ग्राफिक्स के लिए सरल और निःशुल्क।
      4. Pixlr / Snapseed – मोबाइल एडिटिंग के लिए हल्के लेकिन शक्तिशाली टूल।
      5. GIMP – Photoshop का निःशुल्क ओपन-सोर्स विकल्प।

      6. एडिटिंग करते समय सावधानियाँ (Precautions While Editing)

      फोटो एडिटिंग जितनी प्रभावशाली है, उतनी ही जिम्मेदारी भी मांगती है। आज डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है — जैसे मॉर्फिंग, फेक इमेजेस और भ्रामक जानकारी। इसलिए एडिटिंग करते समय निम्न सावधानियाँ अत्यंत आवश्यक हैं –

      (1) अति–एडिटिंग से बचें (Avoid Over-Editing)

      बहुत अधिक फिल्टर, रंग और स्मूदिंग से फोटो नकली लगने लगती है। प्राकृतिक सौंदर्य ही असली आकर्षण होता है। उदाहरण: चेहरे पर अत्यधिक रिटचिंग से वह प्लास्टिक-सा दिखने लगता है।

      (2) मूल छवि सुरक्षित रखें (Preserve Original Image)

      हमेशा एडिट करने से पहले फोटो की एक कॉपी बनाएं। इससे अगर गलती हो जाए तो आप मूल फाइल पर वापस जा सकते हैं।

      (3) वास्तविकता से छेड़छाड़ न करें (Do Not Manipulate Reality)

      पत्रकारिता, डॉक्यूमेंट्री या इतिहास से जुड़ी तस्वीरों में किसी भी वस्तु को जोड़ना या हटाना गलत है। इससे समाज में भ्रम फैल सकता है।

      (4) कॉपीराइट का पालन करें (Respect Copyright)

      किसी दूसरे की फोटो बिना अनुमति इस्तेमाल या एडिट करना अपराध है। इससे कॉपीराइट उल्लंघन (Copyright Violation) के तहत कानूनी कार्यवाही हो सकती है।

      (5) प्राइवेसी का सम्मान करें (Respect Privacy)

      किसी व्यक्ति की फोटो को बिना अनुमति मॉर्फ करके पोस्ट करना डिजिटल अपराध है। एडिटिंग करते समय सदैव नैतिक सीमाएँ बनाए रखें।

      (6) नैतिक सीमाएँ बनाए रखें (Maintain Ethical Boundaries)

      किसी फोटो में ऐसे तत्व न जोड़ें जिससे धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो।

      (7) पेशेवर मानकों का पालन करें (Follow Professional Standards)

      पत्रकारों और विज्ञापन एजेंसियों के अपने एडिटिंग कोड होते हैं — जैसे वास्तविकता बनाए रखना, झूठा प्रभाव न डालना आदि।

      (8) कलर सटीकता (Color Accuracy)

      हर स्क्रीन पर फोटो के रंग एक जैसे दिखें, इसके लिए कलर कैलिब्रेशन टूल का प्रयोग करें।

      (9) संतुलित प्रकाश और छाया (Balance Light and Shadow)

      प्रकाश की अधिकता या कमी फोटो की गहराई बिगाड़ देती है। एडिटिंग में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखें।

      (10) उद्देश्य स्पष्ट रखें (Be Clear About Purpose)

      हर एडिट का एक उद्देश्य होना चाहिए। अगर लक्ष्य स्पष्ट न हो, तो फोटो न तो आकर्षक बनती है और न ही प्रभावशाली।

      7. निष्कर्ष (Conclusion)

      फोटो एडिटिंग एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि दृश्य अभिव्यक्ति की कला (Art of Visual Expression) है।
      यह किसी भी साधारण फोटो में जान डाल देती है — उसे भावनात्मक, कलात्मक और संवादपूर्ण बनाती है। लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि तकनीक का उपयोग तभी श्रेष्ठ है जब वह सत्य, नैतिकता और सृजनात्मकता का संतुलन बनाए रखे। “एडिटिंग का सही उद्देश्य है — वास्तविकता को सुंदर बनाना, न कि उसे बदल देना।”

      Photo Editing

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      Dr. Arvind Kumar Singh

      Dr. Arvind Kumar Singh

      Media Specialist and Writer , UGC NET and JRF, SRF Fellow, Ph.D. in Mass Communication and Journalism subject (Area -Development communication) from BHU in 1997. Experience of Teaching in Various Universities and other academic Institutions including BHU as UGC JRF and SRF fellow, Lucknow university as guest faculty and Allahabad university as visiting fellow. Members of various Media professional organizations. Participation in various national and international Seminar and Conferences. Written several books on electronic and digital media

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