
Importance of skill in Education वर्तमान समय में शिक्षा में कौशल का बढ़ता महत्व
Importance of skill in Education वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब शिक्षा केवल पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उसका उद्देश्य व्यक्ति को व्यवहारिक जीवन के लिए सक्षम बनाना भी हो गया है। समाज, अर्थव्यवस्था और कार्यक्षेत्र में जो निरंतर परिवर्तन हो रहे हैं, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल डिग्री प्राप्त कर लेना ही जीवन में सफल होने के लिए पर्याप्त नहीं है। आज के युग में वही व्यक्ति आगे बढ़ पा रहा है, जिसके पास ज्ञान के साथ-साथ किसी न किसी प्रकार की कौशलभी है। यही कारण है कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में कुशलता के महत्व पर लगातार ज़ोर दिया जा रहा है और इस विषय पर व्यापक स्तर पर चर्चा भी हो रही है।
व्यवहारिक जीवन में व्यक्ति को प्रतिदिन अनेक प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं। ये कार्य केवल सैद्धांतिक जानकारी के आधार पर नहीं किए जा सकते। किसी भी कार्य को सही ढंग से करने के लिए उसमें दक्षता, अभ्यास और अनुभव की आवश्यकता होती है। कौशल वह क्षमता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने ज्ञान को व्यवहार में उतार पाता है। चाहे वह दैनिक जीवन से जुड़े छोटे कार्य हों या किसी बड़े व्यावसायिक क्षेत्र से संबंधित गतिविधियाँ, हर जगह कुशलता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बिना कौशल के ज्ञान अधूरा रह जाता है और व्यक्ति आत्मनिर्भर नहीं बन पाता।
सभी कौशल की प्रकृति भी एक जैसी नहीं होती। कुछ कौशल ऐसे होते हैं, जो सामान्य जीवन में प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक होती हैं। जैसे—समय का सही उपयोग करना, संवाद की कला, समस्याओं का समाधान करना, निर्णय लेने की क्षमता और सहयोग के साथ कार्य करना। ये सभी कौशल व्यक्ति को समाज में संतुलित और आत्मविश्वासी बनाती हैं। इसके साथ ही कुछ कौशल ऐसे भी हैं, जो किसी विशेष व्यवसाय, पेशे या आजीविका से जुड़ी होती हैं। इन सभी कौशल के माध्यम से व्यक्ति अपने करियर का निर्माण करता है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनता है। आज के समय में यह समझना आवश्यक हो गया है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए दोनों प्रकार की कौशल का विकास जरूरी है। Importance of skill in Education
वर्तमान युग को यदि मशीनों और तकनीक का युग कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज लगभग हर क्षेत्र में मशीनों और उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। कृषि, उद्योग, चिकित्सा, शिक्षा, संचार और सेवाओं के क्षेत्र में तकनीकी साधनों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इन मशीनों और उपकरणों के सही उपयोग के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति उनके संचालन और रखरखाव की कुशलता प्राप्त करे। केवल मशीन उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही ढंग से चलाने और उससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने की क्षमता होना भी उतना ही आवश्यक है। यह क्षमता निरंतर अभ्यास और सीखने की प्रक्रिया से ही विकसित होती है।
यदि कोई छात्र समाज में अपना स्थान बनाना चाहता है और एक बेहतर करियर की ओर बढ़ना चाहता है, तो उसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वह अपने छात्र जीवन से ही किसी न किसी कौशल को सीखना प्रारंभ करे। कुशलता का चयन करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह कौशल उसकी रुचि के अनुरूप हो। जिस कार्य में व्यक्ति की रुचि होती है, उसे सीखना और उसमें निपुण होना अपेक्षाकृत सरल और आनंददायक हो जाता है। रुचि के साथ सीखे गए कौशल व्यक्ति को मानसिक संतोष भी प्रदान करती है और लंबे समय तक उस क्षेत्र में बने रहने की प्रेरणा देती है।
किसी भी कौशल को सीखने की प्रक्रिया केवल प्रारंभिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होती। वास्तविक कौशल निरंतर अभ्यास से विकसित होता है। अभ्यास जितना अधिक और नियमित होता है, व्यक्ति की दक्षता उतनी ही बढ़ती जाती है। अभ्यास के अभाव में सीखे गए कौशल धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि छात्र किसी भी कौशल को सीखने के बाद उसका नियमित अभ्यास करें और समय-समय पर स्वयं का मूल्यांकन भी करते रहें। यह निरंतर अभ्यास ही व्यक्ति के मूल्य और कार्यक्षमता को समाज में स्थापित करता है।
छात्र जीवन कौशल सीखने का सबसे उपयुक्त समय होता है। इसी समय व्यक्ति के भीतर सीखने की जिज्ञासा, ऊर्जा और प्रयोग करने की क्षमता सबसे अधिक होती है। कुछ छात्र इस तथ्य को प्रारंभ से ही समझ जाते हैं और पढ़ाई के साथ-साथ किसी न किसी कुशलता को विकसित करने का प्रयास करने लगते हैं। ऐसे छात्र जब उच्च शिक्षा की डिग्री प्राप्त करते हैं, तब तक वे अपने व्यवहारिक जीवन के लिए भी तैयार हो चुके होते हैं। इसके विपरीत, बहुत से छात्र ऐसे भी होते हैं जो केवल पुस्तकीय ज्ञान को ही शिक्षा मान लेते हैं। वे परीक्षाओं में अच्छे अंक तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन व्यवहारिक जीवन में उस ज्ञान का उपयोग करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं।
यह एक सच्चाई है कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान के आधार पर जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान करना संभव नहीं है। ज्ञान को व्यवहार में उतारने की क्षमता ही कौशल कहलाता है। जो छात्र इस बात को समझकर अपने जीवन की दिशा तय करते हैं, वे पढ़ाई पूरी होते ही किसी न किसी प्रकार की गतिविधि में संलग्न हो जाते हैं। वे या तो स्वयं का कार्य प्रारंभ करते हैं या फिर अपने कौशल के आधार पर अवसर प्राप्त कर लेते हैं। इसके विपरीत, जो छात्र केवल डिग्री पर निर्भर रहते हैं, वे नौकरी की तलाश में लंबे समय तक भटकते रहते हैं।
वर्तमान समय में रोजगार की स्थिति भी इस तथ्य को स्पष्ट करती है कि केवल नौकरी पर निर्भर रहना सुरक्षित विकल्प नहीं रह गया है। सरकारी नौकरियों की संख्या सीमित है और प्रतिस्पर्धा अत्यंत कठिन होती जा रही है। निजी क्षेत्र में भी वही व्यक्ति टिक पाता है, जिसके पास विशेष कौशल है। यदि किसी को नौकरी प्राप्त भी होती है, तो उसे बनाए रखने के लिए निरंतर अपनी कौशल को निखारते रहना पड़ता है। इसलिए छात्रों के लिए यह आवश्यक है कि वे नौकरी की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं को इस योग्य बनाएं कि वे अपने बल पर कुछ कर सकें। Career in Journalism and Mass Communication
कुशलता का सबसे बड़ा लाभ आत्मविश्वास होता है। जिस व्यक्ति के पास कोई कुशलता होती है, वह स्वयं को असहाय या लाचार महसूस नहीं करता। उसे यह विश्वास होता है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, वह अपने ज्ञान और कौशल के बल पर कोई न कोई रास्ता अवश्य निकाल लेगा। यही आत्मविश्वास व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाता है और उसे दूसरों पर निर्भर रहने से मुक्त करता है। कुशल व्यक्ति समाज में अपने लिए अवसर स्वयं निर्मित करता है।
आज कौशल सीखने के अवसर पहले की तुलना में कहीं अधिक उपलब्ध हैं। विभिन्न संस्थानों, प्रशिक्षण केंद्रों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के माध्यम से अनेक प्रकार की कौशल सिखाए जा रहे हैं। इसके साथ ही दूरस्थ और प्रत्यक्ष दोनों प्रकार की व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थी अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार सीख सकते हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि छात्र सही स्थान का चयन करें और ईमानदारी तथा निरंतरता के साथ सीखने की प्रक्रिया प्रारंभ करें।
जो व्यक्ति खेल, कला, तकनीकी या किसी अन्य क्षेत्र में अपनी कौशल को लगातार सुधारता है, वही समाज में पहचान बनाता है। उसकी अन्य कमियाँ स्वतः ही पीछे छूट जाती हैं, क्योंकि समाज मूल्य उसी व्यक्ति को देता है जो कुछ कर दिखाने की क्षमता रखता है। कौशल व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारती है, उसके सोचने के तरीके को व्यापक बनाती है और उसे रचनात्मक बनाती है।
नई शिक्षा नीति में भी इस तथ्य को विशेष महत्व दिया गया है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवनोपयोगी बनाना होना चाहिए। इसमें कौशल आधारित शिक्षा, अनुभवात्मक सीख और व्यवहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ज़ोर दिया गया है। यह इस बात का संकेत है कि भविष्य की शिक्षा उसी दिशा में आगे बढ़ेगी, जहाँ ज्ञान और कौशल दोनों का संतुलित विकास हो। Importance of skill in Education
अतः यह आवश्यक है कि छात्र अपने जीवन के प्रारंभिक चरण से ही इस सच्चाई को समझें कि कौशल ही वह आधार है, जिस पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानपूर्ण जीवन का निर्माण किया जा सकता है। जिस दिन कोई छात्र इस दिशा में प्रयास करना शुरू करता है, उसी दिन से उसका जीवन सही मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। कौशल सीखना केवल रोजगार पाने का साधन नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व को सशक्त बनाने का माध्यम भी है। इसलिए प्रत्येक छात्र को चाहिए कि वह अपनी रुचि के अनुरूप किसी न किसी कौशल को अपनाए, उसका निरंतर अभ्यास करे और अपने जीवन को आत्मविश्वास, आनंद और उद्देश्य से भर दे।
Importance of skill in Education

