
What is close up shot ? किसी भी टीवी कार्यक्रम में विविध प्रकार के कैमरा शाट का इस्तेमाल किया जाता है। एक टीवी फिल्म निर्माता का सबसे महत्वपूर्ण कार्य दर्शकों के मन में दिखाये जाने वाले दृश्य के प्रति जुड़ाव लगाव एवं सहानुभूति स्थापित करना होता है। इस प्रकार की लगाव एवं सहानुभूति पैदा करने में क्लोज अप शाट की एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अब यहाॅ पर आगे इस लेख में, क्लोज-अप शॉट एवं इसके विभिन्न उपयोगों एवं महत्व के बारे में उदाहरण के साथ चर्चा की गयी है।
क्लोज-अप शॉट- What is close up shot ?
क्लोज-अप शाट किसी दृश्य में दिखाये जाने वाले पात्र के चेहरे का बहुत ही करीब से लिया गया या खींचा गया कैमरा शॉट होता है। किन्तु इमें कोई वस्तु एवं उसक कोई खास भाग भी हो सकता है। यह किसी भी दृष्य में शामिल व्यक्ति, वस्तु या स्थान का एक स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें शाट दृश्य के विवरण के साथ ही जो कुछ भी हो रहा है, उस पर चरित्र की प्रतिक्रिया को भी दर्शाता है। यदि क्लोज अप शाट को सही प्रकार से प्रस्तुत किया जाये, तो फिर ऐसे शाट चरित्र और दर्शकों के बीच एक भावनात्मक संबंध स्थापित करता है। इसे कई अन्य नाम एवं स्वरूप भी हैं। इसमें बिग क्लोज अप, बिग बिग क्लोज अप तथा एक्सट्रीम क्लोज अप शाट नाम मुख्य रूप से इस्तेमाल किये जाते हैं।

बिग क्लोज अप शाट- यह क्लोज अप शाट का ही एक विषेष रूप या प्रकार है । यह शाट स्क्रीन की संपूर्णता को भरने वाले फारग्राउंड विषय का विवरण दिखाता है। जब किसी व्यक्ति का शाट लिया जाता है तो फिर उसमें माथे से लेकर ठुड्डी तक उसका चेहरा दिखाया जाता है। यह आमने-सामने की बातचीत में अंतरंग क्षेत्र की अत्यधिक निकटता की नकल करता है। What is close up shot ?
एक्सट्रीम क्लोज अप शॉट/अत्यधिक क्लोज-अप
एक्सट्रीम क्लोज अप शॉट/अत्यधिक क्लोज-अप-इसी प्रकार से एक अन्य पद बिग बिग क्लोज अप शाट अथवा एक्सट्रीम क्लोज अप शॉट का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें किसी कैरेक्टर के खास भाग को दर्शाया जाता है।
क्लोज-अप शॉट दर्शकों से संवाद करते हैं कि उन्हें स्क्रीन पर जो दिख रहा है , उस पर बारीकी से ध्यान दिया जाता है। अत्यधिक क्लोज-अप शॉट डिटेल शॉट के रूप में भी जाना जाता है। इसमें शरीर के किसी भाग जैसे आंख, नाक, ओठ, उॅगली आदि का अत्यधिक नजदीकी से शॉट लिया जाता है।
क्लोज-अप शाट का जन्म- मानव आंख एक सीमा के भीतर ही देख सकता है। अभिनेताओं द्वारा भावनाओं को प्रदर्शित करने का प्राथमिक तरीका उनके शरीर के साथ था। टेलीविजन और फिल्म के आगमन के साथ, भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रस्तुतियों और अभिनेताओं के लिए एक नया उपकरण उपलब्ध हो गया। कैमरे के आविष्कार ने क्लोज-अप शाट को जीवन दिया। इसने व्यक्ति के देखने की क्षमता में वृद्धि कर दिया। इसमें किसी दृश्य को सामान्य से बड़ा करके दिखाने की क्षमता रही। चेहरे की अभिव्यक्ति, विविध भाव, घूरने एवं मुस्कुराहट की तरीके, अधिक सूक्ष्म इशारे को इसके माध्यम से दर्षाया जा सकता है। अक्सर संवाद के कई शब्दों की तुलना में एक ही फ्रेम में विविध भावनाओं को प्रस्तुत करते हैं। इसीलिए कार्यक्रम निर्माता यही कहेगा कि बताने से बेहतर दिखाना है।
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क्लोज अप शाट का महत्व-
यह किसी व्यक्ति वस्तु का बड़ा आकार प्रस्तुत करता है। इस प्रकार का आकार काफी करीब होने पर ही दिखता है। किन्तु कैमरा सामान्य आॅख से दिखने वाले शाट से भी बड़ा आकार दिखाता है। दर्शकों को चरित्र के एक विशेष क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। इस प्रकार शाट से दर्शकों को फिल्म की कहानी के एक आवश्यक विवरण का संकेत मिल सकता है। यह शाट किसी खास दृष्य या उसके भाग को प्रमुखता के साथ सामने ला सकता है। क्लोज-अप शाट किसी दृश्य की तीव्रता एवं प्रभाव को बढ़ा सकता है। क्लोज-अप के बिना कोई दृश्य उतना तीव्र नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक क्लोज-अप शॉट्स कथानक में रहस्य का माहौल जोड़ सकते हैं। यह विविध प्रकार के कलात्मक वस्तुओं को दिखाने एवं किसी वस्तु के बनावट को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विविध प्रकार के भाव जैसे डर, खुशी, भय, आक्रोश को व्यक्त करने के लिए इसका इस्तेेमाल किया जाता है।
क्लोज-अप शॉट लेना –
क्लोज अप शाट सभी लेंस से लिया जाना संभव नही है। क्लोज-अप शाट के लिए सही लेंस का उपयोग किया जाता है। इसके लिए 50 मिमी से 100 मिमी फोकस वाले लेंस उपयुक्त होते है। इससे साथ क्लोज-अप शॉट शूट करते हैं। इसमें इस बात का भी ध्यान दिया जाता है कि लेंस ऐसा हो जो कि किसी फोटो की गुणवत्ता को खोए बिना विषय के करीब और व्यक्तिगत हो सके।
क्लोज-अप शाट लेते समय कैमरा को सही स्थिति में रखना आवश्यक है। आँख के स्तर पर, ऊपर या नीचे रख सकते हैं। प्रत्येक विकल्प काफी अलग भावनात्मक प्रभाव पैदा करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप आंखों के स्तर पर दो पात्रों के बीच काट रहे हैं, तो यह दृष्टिगत रूप से समानता का संचार करता है। यह संभवतः संवाद करेगा कि पात्र आमने-सामने मिल रहे हैं। यदि आप उसी दृश्य को एक पात्र के क्लोज-अप के साथ दूसरे पात्र की ओर देखते हुए शूट करते हैं, तो यह शक्ति के असंतुलन को व्यक्त करेगा। जमीन पर खड़ा पात्र स्वाभाविक रूप से पात्र के ऊपर खड़े पात्र की तुलना में बहुत कम शक्तिशाली दिखाई देगा। अपने क्लोज-अप सेट करते समय इन विकल्पों के प्रति सचेत रहना आवश्यक है। सही फ्रेमिंग के साथ, आप अपनी कहानी के भावनात्मक प्रभाव को अधिकतम करेंगे।
आमतौर पर, क्लोज-अप शाट एकाएक नही दिया जाता है। जब पहली बार ऐसे शाट लेते है तो उस समय दर्शकों को कुछ जानकारी देने की आवष्यकता होती है। इसमें सबसे पहले दृश्य का संदर्भ देना होता हैं। इसमें दृश्य का स्थान, समय और शामिल पात्र होते है। इस प्रकार की जानकारी देने के लिए विस्तृत या स्थापित शॉट्स बहुत अच्छे होते हैं। इसके बाद मीडियम तब सही प्रकार से क्लोज-अप शॉट्स का उपयोग किया जाता है। कुछ बेहद करीब हो सकते हैं। अन्य पात्र की नेत्र रेखा के नीचे या नीचे हो सकते हैं। क्लोज-अप के प्रकार के आधार पर कहानी की भाव व्यक्त होते है। इस शॉट को दृश्य के शॉट अनुक्रम में स्थान फिल्म की कथा और प्रवाह को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। क्लोज-अप शाट में यह प्रयास किया जाता है कि कोई भी जानकारी संवाद के माध्यम से दर्शकों को देने के बजाय यह चरित्र की भावनाओं को कैसे संप्रेषित करे।
दृश्य में क्लोज-अप का सही उपयोग- क्लोज अप शाट का उपयोग स्थिति के अनुसार करना आवश्यक है। अनावश्यक संख्या में क्लोज अप शाट दर्शकों का ध्यान भटका सकते हैं। इसलिए क्लोज-अप शॉट्स का सही समय स्थान पर उपयोग करना आवश्यक है। यदि किसी प्लाट में आरम्भ में किसी पात्र के अत्यधिक क्लोज-अप के साथ एक नया दृश्य शुरू होता है तो यह दर्शकों के लिए बहुत परेशान करने वाला होता है । यह भावनाओं को व्यक्त करने के एक उपकरण से अधिक ध्यान भटकाने वाला हो सकता है। बहुत देर तक भी क्लोज अप शाट का इस्तेमाल नही किया जाता है। यह किसी दृश्य में एक भारीपन लाता है। इससे एक बोझिलता महसूस होती है। What is close up shot ?
क्लोज अप शाट का नकारात्मक पक्ष – जब क्लोज-अप शॉट दृश्य के लिए अप्रासंगिक होता हैं, तो यह नकारात्मक प्रभाव ही डालता है। यह कथा के भावनात्मक प्रभाव को कम कर देता है। यह अनावश्यक वस्तु पर ध्यान केन्द्रित करता है। इससे दर्शक गुमराह भी हो सकते हैं। यह कथा प्रवाह सम्पे्रषण में ध्यान भंग भी कर सकता है। जब किसी खास दृश्य भाग पर ध्यान दे करके क्लोज अप शाट लिया जाता है तो फिर दर्शकों का ध्यान उस पर अनावश्यक ही चला जाता है।
सही ढंग से क्लोज-अप का उपयोग – स्क्रिप्ट पढ़ने से यह निर्धारित होता है कि क्लोज अप शाट को शामिल करना चाहिए अथवा नही। यह बात अपने आप से पूछे जा सकता है कि क्या भावनात्मक कथा को आगे बढ़ाने के लिए दृश्य में क्लोज-अप की आवश्यकता होती है। यदि पास पहले से ही एक ऐसा शॉट है जो उस भावना को स्थापित करता है जिसे व्यक्ति व्यक्त करना चाहते हैं, तो क्लोज-अप को काटना सबसे अच्छा हो सकता है। किसी वस्तु को दृष्य में बाद में स्थापित करना है तो उस समय उसका क्लोज अप शाट लिया जाना है।
निष्कर्ष

किसी भी दृश्य को स्पष्ट एवं भाव पूर्ण ढंग से दर्शानेका क्लोज-अप शॉट एक शक्तिशाली तरीका है । इसका उपयोग फिल्म निर्माता को आवश्यकता अनुसार करना चाहिए। यह दर्शकों और पात्रों के बीच भावनात्मक संबंध स्थापित करने में एवं ध्यान आकृष्ट करने में मदद करते हैं। गलत इस्तेमाल होने पर वे मुख्य कथा विवरण दिखाकर या दर्शकों को गुमराह करके भी कहानी को आगे बढ़ा सकते हैं।
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