
Over-the-Shoulder Shot ओवर द शोल्डर शॉट वह कैमरा शॉट होता है जिसमें कैमरा एक पात्र के कंधे या सिर के पीछे से दूसरे पात्र को दिखाता है। इस शॉट में सामने वाले व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जबकि कैमरे के पास खड़े व्यक्ति का कंधा या सिर का आंशिक भाग फ्रेम के किनारे शामिल होता है। इसका उद्देश्य दर्शक को ऐसा अनुभव देना होता है जैसे वह स्वयं उस बातचीत या दृश्य का हिस्सा हो और दो पात्रों के बीच के संबंध को प्रत्यक्ष रूप से देख रहा हो।
2. ओवर द शोल्डर शॉट की विशेषताएँ Characteristics of Over-the-Shoulder Shot
इस शॉट की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें दो स्तर दिखाई देते हैं – अग्रभूमि में कंधा और पृष्ठभूमि में सामने वाले पात्र का चेहरा। इससे दृश्य में गहराई और परतें बनती हैं। यह शॉट आम तौर पर आमने-सामने बातचीत, साक्षात्कार या संवाद दृश्यों में प्रयोग होता है। इसमें चेहरे के भाव स्पष्ट रहते हैं और साथ ही यह भी दिखता है कि बातचीत किस दिशा में हो रही है।
3. ओवर द शोल्डर शॉट का महत्व Importance of Over-the-Shoulder Shot
ओवर द शोल्डर शॉट का महत्व इस बात में है कि यह दृश्य को अधिक यथार्थ और जीवंत बना देता है। दर्शक को ऐसा लगता है जैसे वह दो पात्रों के बीच खड़ा होकर उनकी बातचीत सुन रहा हो। इससे भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है और संवाद का प्रभाव गहरा होता है। यह शॉट दृश्य को केवल देखने योग्य नहीं बल्कि महसूस करने योग्य बनाता है।
4. ओवर द शोल्डर शॉट का कार्य Function of Over-the-Shoulder Shot
इस शॉट का मुख्य कार्य पात्रों के बीच संवाद और संबंध की दिशा को स्पष्ट करना होता है। यह यह बताता है कि कौन किससे बात कर रहा है और बातचीत किस ओर केंद्रित है। यह शॉट कहानी के प्रवाह को सहज बनाए रखता है और दर्शक को दृश्य के भीतर ले जाने में मदद करता है।
5. ओवर द शोल्डर शॉट का उपयोग Use of Over-the-Shoulder Shot
ओवर द शोल्डर शॉट का प्रयोग मुख्य रूप से नाट्य कार्यक्रमों, फिल्मों, टेलीविजन धारावाहिकों, टॉक शो और साक्षात्कारों में किया जाता है। जहाँ दो लोग आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हों और दोनों की प्रतिक्रिया दिखाना आवश्यक हो, वहाँ यह शॉट अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
6. ओवर द शोल्डर शॉट कैसे प्रयोग करें How to Use Over-the-Shoulder Shot
इस शॉट को लेते समय कैमरा उस पात्र के पीछे रखा जाता है जिसके कंधे के ऊपर से दृश्य दिखाना हो। सामने वाले पात्र का चेहरा फ्रेम के मध्य या तिहाई नियम के अनुसार रखें और पीछे वाले पात्र का कंधा फ्रेम के किनारे हल्के रूप में दिखाई दे। ध्यान रखें कि सामने वाला पात्र पूरी तरह फोकस में हो और पीछे वाला कंधा केवल संकेत के रूप में दिखाई दे, ताकि दृश्य संतुलित रहे।
7. ओवर द शोल्डर शॉट के नकारात्मक पहलू Negative Aspects of Over-the-Shoulder Shot
यदि यह शॉट सही ढंग से न लिया जाए तो पीछे वाले पात्र का कंधा सामने वाले के चेहरे को ढक सकता है, जिससे दृश्य अस्पष्ट हो जाता है। बार-बार प्रयोग करने पर यह शॉट एकरस लगने लगता है और दर्शक की रुचि घट सकती है। गलत कोण या फोकस के कारण दर्शक भ्रमित भी हो सकता है और संवाद की स्पष्टता प्रभावित हो सकती है।
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