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      Home Media Study Material Communication

      Characteristics of non-verbal communication

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      4 months ago
      in Communication, Human Communication
      0

      Characteristics of non-verbal communication गैर-मौखिक संचार की विशेषताएँ

      Characteristics of non-verbal communication गैर-मौखिक संचार (Non-Verbal Communication) वह संचार है जिसमें शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि भाव, संकेत, हावभाव, चेहरे के भाव, शारीरिक मुद्रा, आँखों का संपर्क, आवाज़ का उतार-चढ़ाव आदि के माध्यम से संदेश प्रेषित किया जाता है। यह संचार का सबसे प्राचीन और स्वाभाविक रूप है। गैर-मौखिक संचार मानव संपर्क में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, मौखिक आदान-प्रदान में पूरक एवं विकल्प के तौर पर कार्य करता है और अक्सर अकेले शब्दों की तुलना में संदेशों को अधिक शक्तिशाली ढंग से व्यक्त करता है। यहां हम गैर-मौखिक संचार की प्रमुख विशेषताओं और पारस्परिक गतिशीलता के लिए उनके निहितार्थों के बारे में चर्चा की गयी है।

      • एक से अधिक तरीके का इस्तेमाल
      • लगातार संचार
      • चेतन एवं अवचेतन रूप
      • संस्कृति से जुड़ाव
      • संदर्भ-निर्भरता
      • वर्बल संचार के पूरक
      • व्यक्तिगत विशिष्टता
      • अंतरक्रिया का नियंत्रण
      • भावनाओं की अभिव्यक्ति
      • फीडबैक की उपलब्धता
      • अनुकूलनशीलता एवं गलत व्याख्या
      • उम्र के साथ परिवर्तन
      • स्त्री एवं पुरुष संकेतों में अंतर

      1. एक से अधिक तरीके का इस्तेमाल

      गैर-मौखिक संचार का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यह केवल एक ही चैनल तक सीमित नहीं होता। जब हम बातचीत करते हैं, तो हमारे चेहरे की मुस्कान, आँखों का संपर्क, शरीर की मुद्रा, हाथों के इशारे, आवाज़ की गति और टोन—ये सभी मिलकर संदेश पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई कहता है “मुझे खुशी है” और साथ में उसकी आँखें चमक रही हों, मुस्कान फैली हो और आवाज़ उत्साहित हो—तो श्रोता को उसकी बात कहीं अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय लगती है।
      इसके विपरीत, यदि वही वाक्य बोला जाए लेकिन चेहरा उदास और आवाज़ धीमी हो, तो सामने वाले को विरोधाभास महसूस होगा। यही विशेषता इसे शब्दों से कहीं अधिक प्रभावी बनाती है। Characteristics of non-verbal communication

      2. लगातार संचार

      शब्दों का संचार एक निश्चित आरंभ और अंत लिए होता है—आपने बोलना शुरू किया और फिर समाप्त कर दिया। लेकिन गैर-मौखिक संचार लगातार बहता रहता है। आमने-सामने बैठते समय चाहे कोई बोले या न बोले, उसकी आँखों की हरकतें, होंठों की हलचल, हाथ-पैर की गतिविधि और शरीर का झुकाव लगातार संवाद करता रहता है। उदाहरण के लिए, यदि श्रोता बार-बार सिर हिला रहा है तो यह संकेत है कि वह ध्यान दे रहा है, वहीं अगर वह कुर्सी पर पीछे झुककर ऊबाऊ चेहरा बना रहा है तो यह संदेश है कि विषय अब उसका ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रहा है ।

      3. चेतन एवं अवचेतन रूप

      गैर-मौखिक संचार की एक रोचक विशेषता यह है कि यह सचेत (conscious) और अवचेतन (subconscious) दोनों रूपों में होता है। कभी-कभी हम जानबूझकर आँखों में देखकर विश्वास जताते हैं या हाथ मिलाकर अपनापन दिखाते हैं। लेकिन कई बार हमारी भावनाएँ बिना सोचे-समझे स्वतः चेहरे पर आ जाती हैं—जैसे घबराहट में पसीना आना, असुविधा में होंठ काटना या झूठ बोलते समय आँखें चुराना। यही कारण है कि गैर-मौखिक संचार कई बार हमारे मन की वास्तविक स्थिति उजागर कर देता है, भले ही शब्द कुछ और कह रहे हों।

      4. संस्कृति से जुड़ाव

      गैर-मौखिक संकेत अक्सर संस्कृति और परंपराओं से प्रभावित होते हैं। उदाहरण के लिए—भारत में झुककर नमस्ते करना सम्मान का प्रतीक है, जापान में गहरा झुककर प्रणाम करना परंपरा है, जबकि पश्चिमी देशों में हाथ मिलाना आम है। लेकिन कुछ संकेत सार्वभौमिक होते हैं, जैसे—रोना हमेशा दुख को दर्शाता है और हँसी खुशी को। यही कारण है कि किसी भी संस्कृति का व्यक्ति चाहे किसी भी भाषा को न समझे, चेहरे के भावों को देखकर भावनाओं का अनुमान आसानी से लगा लेता है।

      5. संदर्भ-निर्भरता

      गैर-मौखिक संचार का अर्थ हमेशा संदर्भ पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए—किसी मित्र के कंधे पर हाथ रखना समर्थन और निकटता का संकेत हो सकता है। लेकिन यही इशारा किसी औपचारिक स्थिति में किया जाए तो इसे अपमानजनक भी माना जा सकता है। इसी तरह मुस्कान एक स्थिति में स्वागत का प्रतीक है, वहीं दूसरी स्थिति में यह असहजता छुपाने का तरीका हो सकता है। इसलिए गैर-मौखिक संचार को सही समझने के लिए हमेशा परिस्थिति और वातावरण को ध्यान में रखना जरूरी है।

      6. वर्बल संचार के पूरक

      गैर-मौखिक संचार अक्सर मौखिक संचार को पूरक करता है। जब कोई कहता है “मुझे आपसे बहुत खुशी हुई” और उसके चेहरे पर चमकती मुस्कान है, तो श्रोता उस संदेश पर विश्वास करता है। लेकिन यदि वही वाक्य बोला जाए और चेहरा गंभीर हो, तो संदेश संदिग्ध लगने लगता है। यानी यह शब्दों को पुष्ट भी कर सकता है और उनके विपरीत भी जा सकता है। यही कारण है कि कहा जाता है—शब्द झूठ बोल सकते हैं, लेकिन शरीर की भाषा अक्सर सच उजागर करती है।

      7. व्यक्तिगत विशिष्टता

      हर व्यक्ति की अपनी एक विशेष गैर-मौखिक शैली होती है। कुछ लोग आत्मविश्वास के साथ सीधी नज़र मिलाते हैं, कुछ हँसते समय हाथ हिलाते हैं, तो कुछ लोग शर्म के कारण नज़रें चुराते हैं। यह शैली व्यक्ति के अनुभव, परवरिश, शिक्षा और मानसिक स्थिति से प्रभावित होती है। यही कारण है कि एक ही स्थिति में दो लोग बिल्कुल अलग-अलग बॉडी लैंग्वेज प्रदर्शित कर सकते हैं।

      8. अंतरक्रिया का नियंत्रण

      गैर-मौखिक संकेत बातचीत को दिशा और नियंत्रण देते हैं। उदाहरण के लिए—सिर हिलाना सामने वाले को आगे बोलने का संकेत है, जबकि हाथ उठाकर रुकने का इशारा बातचीत को रोकने का संकेत है। इसी प्रकार घड़ी देखना यह जताता है कि वक्त कम है और बातचीत संक्षिप्त होनी चाहिए। यानी यह संचार प्रक्रिया को संगठित और नियंत्रित रखने का माध्यम है।

      9. भावनाओं की अभिव्यक्ति

      भावनाओं को व्यक्त करने में गैर-मौखिक संचार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण और वास्तविक होती है। गुस्सा, खुशी, उदासी, भय या आश्चर्य—ये सब चेहरे और शरीर के माध्यम से तुरंत झलक जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति कहे “मैं नाराज़ नहीं हूँ” लेकिन उसका चेहरा लाल हो और भौंहें तनी हों, तो उसके शब्दों से अधिक उसकी बॉडी लैंग्वेज पर भरोसा किया जाएगा।

      10. फीडबैक की उपलब्धता Telepathy communication

      गैर-मौखिक संचार तत्काल फीडबैक उपलब्ध कराता है। जैसे यदि श्रोता बार-बार सिर हिला रहा है तो वक्ता को पता चलता है कि बात समझ आ रही है। वहीं, यदि श्रोता मोबाइल देखने लगे तो यह संकेत है कि उसकी रुचि खत्म हो रही है।
      इस प्रकार वक्ता अपनी बातों की गति, शैली और विषय बदल सकता है।

      11. अनुकूलनशीलता एवं गलत व्याख्या

      गैर-मौखिक संचार बहुत अनुकूलनशील (adaptable) है। व्यक्ति परिस्थिति और संबंधों के अनुसार अपने हावभाव बदल सकता है। लेकिन इसका एक खतरा भी है—गलत व्याख्या। जैसे किसी की मुस्कान एक व्यक्ति को सच्ची लगे, तो दूसरे को यह व्यंग्यपूर्ण लग सकती है। इसलिए इसे समझने के लिए संवेदनशीलता और अनुभव की आवश्यकता होती है।

      12. उम्र के साथ परिवर्तन इसे भी पढ़ें – How to start an effective speech कैसे शुरुआत करें प्रभावी भाषण

      गैर-मौखिक संकेत उम्र के साथ बदलते हैं। बच्चे रोकर अपनी जरूरत बताते हैं, किशोर अपनी आँखों और हावभाव से ज्यादा भाव प्रकट करते हैं, जबकि उम्रदराज लोग अक्सर सीमित और सधे हुए इशारों का इस्तेमाल करते हैं। समय के साथ यह न केवल बदलता है, बल्कि व्यक्ति की एक पहचान और विशिष्टता भी बन जाता है।

      13. स्त्री एवं पुरुष संकेतों में अंतर

      महिलाएँ प्रायः अधिक अभिव्यंजक और संवेदनशील गैर-मौखिक संकेत देती हैं। वे चेहरे के भाव और हाथों के इशारों से भावनाएँ स्पष्ट रूप से व्यक्त करती हैं। पुरुष अक्सर संयमित और नियंत्रित हावभाव का प्रयोग करते हैं। कई बार एक ही इशारा स्त्रियों द्वारा अपनापन दर्शाता है, जबकि पुरुषों द्वारा किया जाने पर उसे आक्रामक या नकारात्मक माना जाता है। यही कारण है कि लिंग के आधार पर गैर-मौखिक संचार की व्याख्या भी अलग-अलग होती है।

      इसे भी पढ़ें- Importance of Intro in Speech भाषण के आरंभिक शब्दों का महत्व

      निष्कर्ष

      गैर-मौखिक संचार शब्दों से कहीं आगे जाकर भावनाओं, विश्वास और संबंधों की गहराई को व्यक्त करता है। यह निरंतर, बहु-आयामी और सांस्कृतिक रूप से विविध है। इसे सही ढंग से समझना एक कला है, और जो इसे समझ लेता है, वह लोगों के साथ गहरे स्तर पर जुड़ने की क्षमता विकसित कर लेता है। Characteristics of non-verbal communication

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      Dr. Arvind Kumar Singh

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