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      Kinds of Research

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      3 months ago
      in Media Study Material, research
      0

      Kinds of Research शोध के प्रकार

      प्रस्तावना (Introduction)

      Kinds of Research शोध वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मनुष्य ज्ञान की खोज करता है, तथ्यों को परखता है, सिद्धांतों की जाँच करता है और नए विचारों का निर्माण करता है। जैसे-जैसे समाज, तकनीक, अर्थव्यवस्था और मानव व्यवहार जटिल होते गए, शोध के तरीकों में भी विविधता आई। हर शोध का उद्देश्य एक ही नहीं होता; कुछ शोध गहन वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित होते हैं, कुछ तथ्य संग्रह पर, कुछ सिद्धांत निर्माण पर और कुछ व्यवहारिक समस्याओं के समाधान पर। इसलिए शोध को विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है ताकि शोधार्थी यह समझ सके कि कौन-सा शोध किस उद्देश्य के लिए उपयुक्त है।
      शोध के प्रकार न केवल शोध की दिशा निर्धारित करते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि किस प्रकार की पद्धति, डेटा और विश्लेषण का उपयोग किया जाएगा। नीचे शोध के प्रमुख प्रकारों को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है।


      1. मौलिक शोध (Basic Research)

      Basic Research / मौलिक शोध वह शोध है जिसका उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना, सिद्धांतों का विस्तार करना और किसी विषय की गहरी समझ विकसित करना होता है। इसका लक्ष्य किसी समस्या का तात्कालिक समाधान देना नहीं होता, बल्कि विषय का बुनियादी ढांचा मजबूत करना होता है। उदाहरण के लिए मानव व्यवहार का मूल कारण क्या है, भाषा कैसे विकसित हुई, ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ—इन प्रश्नों के उत्तर मौलिक शोध में खोजे जाते हैं। मौलिक शोध भविष्य में नए सिद्धांतों, नियमों और अवधारणाओं को जन्म देता है। यह शोध शिक्षा, दर्शन, समाजशास्त्र, भौतिकी, मनोविज्ञान और अन्य विषयों की वैचारिक नींव मजबूत करने का कार्य करता है।


      2. अनुप्रयुक्त शोध (Applied Research) Kinds of Research

      Applied Research / अनुप्रयुक्त शोध सीधे-सीधे वास्तविक समस्याओं के समाधान से जुड़ा होता है। उदाहरण के लिए सड़क दुर्घटनाएँ क्यों बढ़ रही हैं, खेती में उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, किसी बीमारी का प्रभाव कैसे कम किया जाए—ये सभी प्रश्न अनुप्रयुक्त शोध के अंतर्गत आते हैं। इस शोध का उद्देश्य व्यावहारिक कठिनाइयों का वैज्ञानिक समाधान ढूँढना होता है। अनुप्रयुक्त शोध समाज, स्वास्थ्य, प्रशासन, व्यापार, मीडिया, पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी होता है। यह शोध उन परिस्थितियों को पहचानता है जहाँ सुधार की आवश्यकता है और फिर समस्या को दूर करने के लिए उपयोगी सुझाव प्रस्तुत करता है।


      3. वर्णनात्मक शोध (Descriptive Research)

      Descriptive Research / वर्णनात्मक शोध किसी वस्तु, घटना, समूह या व्यवहार का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इस शोध में “क्या”, “कैसे” और “किस रूप में” जैसे प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है। उदाहरण के लिए किसी गाँव की सामाजिक संरचना कैसी है, किसी संस्था की कार्यप्रणाली कैसी है, किसी बीमारी के लक्षण क्या हैं—यह सब वर्णनात्मक शोध में आता है। इस शोध का उद्देश्य तथ्यात्मक जानकारी देना होता है, न कि किसी सिद्धांत को सिद्ध या खंडित करना। यह शोध सामाजिक विज्ञान, शिक्षा, मीडिया अध्ययन और मानवशास्त्र जैसे क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी होता है।


      4. विश्लेषणात्मक शोध (Analytical Research)

      Analytical Research / विश्लेषणात्मक शोध केवल तथ्यों को प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनका गहन विश्लेषण करता है। इस शोध में डेटा को व्यवस्थित किया जाता है, तुलना की जाती है, निष्कर्ष निकाले जाते हैं और कारण-परिणाम संबंधों का अध्ययन होता है। उदाहरण के लिए चुनाव परिणाम क्यों बदले, किसी नीति का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर कैसा पड़ा, मीडिया संदेश जनता की राय पर कैसे प्रभाव डालते हैं—इन प्रश्नों का उत्तर विश्लेषणात्मक शोध में मिलता है। शोधकर्ता उपलब्ध डेटा का सूक्ष्म विश्लेषण करता है और वैज्ञानिक तर्क के आधार पर निष्कर्ष प्रस्तुत करता है। Kinds of Research


      5. गुणात्मक शोध (Qualitative Research)

      Qualitative Research / गुणात्मक शोध मानव व्यवहार, भावनाओं, अनुभवों, विश्वासों और सामाजिक प्रक्रियाओं को गहराई से समझने के लिए किया जाता है। इसमें संख्यात्मक डेटा नहीं होता, बल्कि शब्द, विचार, मत और अनुभवों को प्रमुख माना जाता है। उदाहरण के लिए ग्रामीण महिलाओं के अनुभव क्या हैं, एक छात्र परीक्षा को कैसे महसूस करता है, प्रवासी मजदूर किन मानसिक दबावों से गुजरते हैं—ये सब गुणात्मक शोध में अध्ययन किए जाते हैं। इस शोध में साक्षात्कार, अवलोकन, समूह चर्चा और व्यक्तिगत कथाएँ मुख्य साधन होते हैं। यह शोध सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और मानव विज्ञान के क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।


      6. मात्रात्मक शोध (Quantitative Research)

      Quantitative Research / मात्रात्मक शोध संख्याओं, आँकड़ों और सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित होता है। इसमें तथ्य मापने योग्य होते हैं और शोध वैज्ञानिक गणना के माध्यम से निष्कर्ष तक पहुँचता है। उदाहरण के लिए कितने लोग किसी नीति का समर्थन करते हैं, बच्चों की पढ़ने की क्षमता कितनी बढ़ी, प्रदूषण का स्तर कितने प्रतिशत बढ़ा—ये सब मात्रात्मक शोध के दायरे में आते हैं। यह शोध अत्यंत सटीक होता है क्योंकि इसमें गणित और सांख्यिकी का उपयोग किया जाता है। विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मीडिया अध्ययन और स्वास्थ्य विज्ञान में इसका व्यापक उपयोग होता है।


      7. ऐतिहासिक शोध (Historical Research)

      Historical Research / ऐतिहासिक शोध इतिहास की घटनाओं, व्यक्तियों, विचारों और प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। इस शोध में पुराने दस्तावेज, अभिलेख, समाचार पत्र, पत्र, पुरालेख, शिलालेख आदि सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य अतीत को सही परिप्रेक्ष्य में समझना होता है, ताकि वर्तमान और भविष्य के लिए सार्थक निष्कर्ष निकाले जा सकें। उदाहरण के लिए स्वतंत्रता संग्राम का विश्लेषण, किसी सामाजिक आंदोलन का विकास, किसी विचारधारा का उद्भव—ये सब ऐतिहासिक शोध के अंतर्गत आते हैं।


      8. प्रायोगिक शोध (Experimental Research)

      Experimental Research / प्रायोगिक शोध विज्ञान आधारित शोध का सबसे महत्वपूर्ण प्रकार है। इस शोध में नियंत्रित वातावरण में प्रयोग किया जाता है और देखा जाता है कि किसी एक परिवर्तन का दूसरे तत्व पर क्या प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए किसी दवा का प्रभाव, किसी तकनीक की उपयोगिता, किसी खाद का उत्पादन पर असर—ये सब प्रयोगात्मक शोध में परीक्षण किए जाते हैं। इस शोध में कारण और परिणाम के संबंध वैज्ञानिक तरीके से स्थापित किए जाते हैं।


      9. अन्वेषणात्मक शोध (Exploratory Research)

      Exploratory Research / अन्वेषणात्मक शोध तब किया जाता है जब किसी विषय पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इसका उद्देश्य किसी प्रश्न की प्रारंभिक समझ विकसित करना होता है। उदाहरण के लिए किसी नए सामाजिक व्यवहार का अध्ययन, किसी उभरते रुझान का प्रारंभिक विश्लेषण, किसी अज्ञात समस्या की पहचान—ये सब अन्वेषणात्मक शोध में आते हैं। यह शोध आगे के विस्तृत शोध की दिशा तय करता है।


      10. क्रियात्मक शोध (Action Research)

      Action Research / क्रियात्मक शोध किसी संस्था, समूह या संगठन की समस्या को हल करने के लिए किया जाता है। यह शोध तत्काल सुधार लाने के उद्देश्य से होता है। उदाहरण के लिए स्कूल में विद्यार्थियों के कम परिणाम क्यों आ रहे हैं और इसे कैसे सुधारा जाए—इस समस्या पर शिक्षक द्वारा किया गया शोध क्रियात्मक शोध कहलाता है। यह शोध व्यावहारिक परिस्थितियों में किया जाता है और इसके परिणाम तुरंत लागू किए जा सकते हैं।

      11.सहसंबंधात्मक शोध — Correlation Research

      सहसंबंधात्मक शोध उन विधियों का समूह है जिनमें दो या अधिक चरों के बीच संबंध की प्रकृति, दिशा और तीव्रता को मापा जाता है। इस प्रकार के शोध में शोधकर्ता यह निर्धारित करने का प्रयास करता है कि क्या एक चर के बदलने के साथ दूसरा चर भी किसी रूप में बदलता है, और यदि बदलता है तो क्या वह सकारात्मक (दोनों साथ बढ़ते/घटते हैं) है या नकारात्मक (एक बढ़े तो दूसरा घटे) है। सहसंबंधात्मक अध्ययन आमतौर पर सर्वेक्षण, प्रश्नावली, मौजूदा आँकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण तथा समयबद्ध अवलोकनों द्वारा किए जाते हैं। उदाहरण के लिए पढ़ाई के घंटों और परीक्षा में प्राप्त अंकों के बीच संबंध मापने के लिए बड़े नमूनों पर आँकड़े जुटाकर पियरसन या स्पीयरमैन जैसी सहसंबंध सूचकियाँ गणना की जाती हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सहसंबंध केवल संबंध दिखाता है — यह कारण बताने का अधिकार नहीं देता; इसलिए यदि दो चरों में मजबूत सहसंबंध मिलता है तो आगे कारण-परिणाम जाँचने के लिए प्रायोगिक या कारणात्मक अध्ययन सुझाए जाते हैं। सहसंबंधात्मक शोध सामाजिक विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थशास्त्र में व्यापक उपयोग में आता है क्योंकि वहाँ अनेक चरों के बीच जटिल परस्पर सम्बन्ध होते हैं जिन्हें समझना आवश्यक होता है; इसकी एक सीमा यह है कि सहसंबंध के आधार पर जल्दी-जल्दी निष्कर्ष निकालना भ्रामक हो सकता है, इसलिए निष्कर्षों को सावधानी से व्याख्यायित किया जाना चाहिए।


      तुलनात्मक शोध — Comparative Research

      तुलनात्मक शोध दो या अधिक समूहों, संरचनाओं, नीतियों, संस्कृतियों या अवधारणाओं की प्रणालीगत तुलना प्रस्तुत करता है ताकि समानताएँ, अंतर और उनके कारण स्पष्ट हो सकें। यह शोध पद्धति न केवल सतह पर दिखने वाले अंतर को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक, ऐतिहासिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों में उनकी जड़ें भी सामने लाती है। तुलनात्मक अध्ययन में शोधकर्ता को यह निर्धारित करना होता है कि तुलना के लिए उपयुक्त मापदण्ड, संकेतक और संदर्भ क्या होंगे; फिर मानकीकृत डेटा, क्षेत्रीय रिपोर्ट, नीतिगत दस्तावेज़ और प्रत्यक्ष अवलोकन के आधार पर निष्कर्ष निकाले जाते हैं। उदाहरण स्वरूप यदि किसी दो देशों की शिक्षा प्रणालियों की तुलना की जाए तो पाठ्यचर्या, शिक्षक प्रशिक्षण, संसाधन आवंटन तथा छात्र-प्रदर्शन जैसे संकेतकों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाता है और सांस्कृतिक या आर्थिक भिन्नताओं को परिणामों में समायोजित किया जाता है। तुलनात्मक शोध नीति-निर्माण, सुधारात्मक अनुकरण और वैश्विक सन्दर्भ में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं के चयन हेतु उपयोगी है; किन्तु इसकी चुनौतियाँ यह हैं कि सांस्कृतिक भिन्नताएँ, डेटा की उपलब्धता और मापदण्डों के अनुरूपता पर विशेष ध्यान देना पड़ता है अन्यथा गलत तुलना से भ्रामक परिणाम निकल सकते हैं।


      अनुवर्ती शोध — Longitudinal Research

      अनुवर्ती शोध लंबी अवधि में एक ही समूह, व्यक्तियों या संस्थागत सेट का बार-बार अवलोकन कर के परिवर्तन के पैटर्न, विकास की प्रवृत्तियाँ तथा दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन करता है। यह उद्देश्यपूर्ण अध्ययन कई वर्षों या दशकों तक चलते हैं और इनसे समय के साथ होने वाले कारण और परिणामों का क्रमिक विश्लेषण संभव होता है। अनुवर्ती डिज़ाइन में शोधकर्ता प्रारम्भ में नमूना निर्धारित करता है, वहीं समय-समय पर उन्हीं व्यक्तियों पर सर्वेक्षण, परीक्षण या अवलोकन दोहराता है; इससे जीवन-चरणीय विकास, नीति-परिणाम, दीर्घकालिक रोगप्रवृत्तियाँ या सामाजिक परिवर्तन का भरोसेमंद पता चलता है। उदाहरणार्थ बाल-विकास का दस वर्षों तक लगातार अध्ययन यह दर्शा सकता है कि प्रारम्भिक शिक्षा, परिवारिक परिवेश या पोषण का कौन-सा पहलू बाद के शैक्षणिक परिणामों पर प्रभावी रहा। इसकी मजबूती यह है कि पारस्परिक समय-आधारित कारणों को चिन्हित किया जा सकता है; परंतु सीमाएँ भी हैं — लंबे समय तक प्रतिभागियों की ट्रैकिंग महँगी, समय-ग्रहणशील और ड्रॉपआउट (नमूना छूटना) जैसी समस्याएँ उत्पन्न कर सकती हैं, इसलिए डिजाइन करते समय नमूना आकार, पुनः-संपर्क रणनीति और नैतिक अनुमोदन पर विशेष ध्यान आवश्यक होता है।


      क्रॉस-सेक्शनल शोध — Cross-Sectional Research

      क्रॉस-सेक्शनल शोध एक दिए हुए समय बिन्दु पर विविध समूहों या लोगों की स्थिति, दृष्टिकोण और व्यवहार का तुलनात्मक निरीक्षण करता है। यह त्वरित और व्यावहारिक पद्धति है जब वर्तमान स्थिति की झलक प्राप्त करनी हो; सर्वेक्षण और प्रश्नावली के माध्यम से एक समय खिड़की में विभिन्न आयु, वर्ग, लिंग या क्षेत्र के नमूनों का आँकड़ा एकत्रित कर के व्यावहारिक निष्कर्ष निकाले जाते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी शहर में अलग-अलग आयु वर्गों के स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के स्तर का एक ही समय पर आकलन करना हो तो क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन उपयुक्त है। इसकी मुख्य विशेषता तीव्रता और लागत-कुशलता है, परन्तु यह समय के साथ आने वाले परिवर्तन और कारण-परिणाम संबंधों का पता नहीं देता, अर्थात यह बताता है कि इस वक्त क्या स्थिति है पर यह नहीं बताता कि यह स्थिति कैसे बनी। इसलिए नीति-निर्माण के प्रारम्भिक चरणों या जनमत सर्वेक्षणों के लिए यह बहुत उपयोगी है, पर गहरी प्रक्रियात्मक समझ के लिए अन्य लंबी अवधिक डिज़ाइनों के साथ संयोजन बेहतर रहता है।


      नृवंशात्मक शोध — Ethnographic Research

      नृवंशात्मक शोध जातीय समूहों, संस्कृतियों और समुदायों के जीवन को सर्वथा गहराई से समझने का तरीका है, जिसमें शोधकर्ता लंबे समय तक उस समुदाय के बीच रहकर, सहभागिता कर के और दैनिक गतिविधियों में शामिल होकर सांस्कृतिक अर्थों, सामाजिक संरचनाओं, रीति-रिवाजों तथा मान्यताओं की समृद्ध विवेचना करता है। यह विधि केवल बाह्य अवलोकन पर निर्भर नहीं रहती; यहाँ शोधकर्ता स्थानीय भाषा, सामाजिक संकेतों, संबंधित प्रतीकों तथा व्यवहार के अंतर्निहित तर्कों को स्वयं अनुभव कर के समझता है। उदाहरण के रूप में किसी आदिवासी समाज के पारिवारिक सम्बन्ध, अर्थ व्यवस्था, औषधि-प्रथाएँ या समारोहों का विस्तृत नृवंशात्मक विश्लेषण हमें उस समाज के दृष्टिकोण को अपने सन्दर्भ में उजागर करने में मदद करता है। नृवंशात्मक शोध की ताकत इसकी गहराई और विण्डीनता (thick description) में है—यह उन सूक्ष्म सार्थकताओं को पकड़ता है जो सतही सर्वेक्षणों से छूट जाती हैं; किन्तु यह समय-निभर वाला और शोधक की निष्पक्षता व सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर भी निर्भर रहता है, अतः शोधकर्ता की उपस्थिति स्वयं कुछ व्यवहारों को प्रभावित कर सकती है जिसे नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण होता है।


      केस अध्ययन शोध — Case Study Research

      केस अध्ययन शोध विशिष्ट व्यक्ति, घटना, संस्था या परिस्थिति का विस्तृत और बहुआयामी विश्लेषण प्रदान करता है, जहाँ शोध का उद्देश्य न केवल जानकारी संग्रह करना बल्कि उस विशेष मामले के व्यवहारिक और सैद्धांतिक अर्थों को गहराई से समझना होता है। केस स्टडी में शोधकर्ता बहु-आयामी स्रोतों—दस्तावेज़, साक्षात्कार, अवलोकन, अभिलेख और संदर्भ रिपोर्टों—का सहारा लेकर घटना के परिप्रेक्ष्य, कारणों, प्रक्रियाओं और परिणामों का समग्र चित्र बनाता है। उदाहरणत: किसी अस्पताल में लागू किए गए नवीन प्रबंधन मॉडल की सफलता के कारणों का केस स्टडी में विश्लेषण नीति-निर्माण हेतु उपयोगी साक्ष्य दे सकता है। केस अध्ययन की विशेष उपयोगिता तब होती है जब किसी अनूठी या जटिल घटना से व्यापक सिद्धान्तों तक की समझ विकसित करनी हो; तथापि इसकी सीमाएँ यह हैं कि एकल या सीमित मामलों का अत्यधिक सामान्यीकरण संदिग्ध हो सकता है, इसलिए निष्कर्षों को अन्य मामलों के साथ सावधानीपूर्वक तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में परीक्षण करना आवश्यक है।


      मिश्रित विधि शोध — Mixed Method Research

      मिश्रित विधि शोध गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रकार के अनुसंधान का संयोजन कर के विषय की बहुआयामी समझ प्रदान करता है; यहाँ पर संख्यात्मक आँकड़ों के कठोर विश्लेषण को गुणात्मक गहराई के साथ जोड़कर अधिक समेकित और भरोसेमंद निष्कर्ष प्राप्त किए जाते हैं। इस पद्धति में पहले मात्रात्मक सर्वे द्वारा व्यापक पैमाने का डेटा एकत्र किया जा सकता है और बाद में चुनिन्दा नमूनों से गुणात्मक साक्षात्कार लिये जा सकते हैं, या उल्टा गुणात्मक अन्वेषण के बाद प्राप्त थीमों को मात्रात्मक मापन के द्वारा मान्य किया जा सकता है। उदाहरण के लिए किसी शैक्षणिक हस्तक्षेप के प्रभाव को आँकड़ों से मापने के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुभवात्मक दृष्टिकोणों को भी समझना हो, तो मिश्रित विधि सर्वोत्तम रहती है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यह दोनों विधियों की कमजोरियों को परस्पर पूरक कर देता है और ठोस, व्यापक प्रमाण प्रदान करता है; परन्तु इसके लिए अनुसंधान डिजाइन जटिल होता है, समय और संसाधन अपेक्षाकृत अधिक चाहिए और विश्लेषण में दोनों प्रकार के डेटा का समेकन करना चुनौतीपूर्ण होता है।


      उपसंहार (Conclusion) Kinds of Research Meaning of Research रिसर्च का अर्थ Beginning of research जाने शोध कार्य की यात्रा को

      शोध के प्रकारों की यह विविधता यह सिद्ध करती है कि शोध एक व्यापक, बहुआयामी और सतत प्रक्रिया है। हर शोध एक विशेष उद्देश्य के लिए उपयुक्त होता है और उसकी अपनी विशिष्ट पद्धति, प्रक्रिया और उपयोगिता होती है। चाहे उद्देश्य ज्ञान का विस्तार करना हो, किसी सिद्धांत को प्रमाणित करना हो, किसी समस्या का समाधान ढूँढना हो, किसी व्यवहार को समझना हो, या किसी नीति का मूल्यांकन करना हो—प्रत्येक परिस्थिति के लिए शोध का एक उपयुक्त प्रकार मौजूद है। शोध के इन प्रकारों को समझना इसलिए आवश्यक है ताकि शोधार्थी अपने उद्देश्य, विषय और पद्धति के अनुसार सही शोध-मार्ग चुन सके। शोध न केवल ज्ञान का निर्माण करता है बल्कि समाज, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और मानव जीवन की गुणवत्ता को भी निरंतर बेहतर बनाता है। यही कारण है कि शोध के प्रकारों का अध्ययन शोध-प्रक्रिया की सफलता का आधार माना जाता है।

      Kinds of Research

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