The role of media in development is well accepted by media scholars. Some basic concepts in this reference have been discussed here.
सामाजिक आर्थिक विकास के संदर्भ में संचार वैज्ञानिकों ने मीडिया की भूमिका को बहुत ही महत्वपूर्ण माना है और इस संदर्भ में उन्होंने कई प्रकार के अवधारणा एवं सिद्धांत भी प्रस्तुत किए हैं जिसमें कि मीडिया को शामिल करते हुए विकास कार्य किए जा सकते हैं मीडिया समाज में विकास कार्य की गति को बढ़ा देता है । भिन्न-भिन्न संचार वैज्ञानिकों ने मीडिया की भूमिका के संदर्भ में जो विचार और अवधारणा प्रस्तुत की है उसमें से कुछ अवधारणाओं एवं सिद्धांत संबंधी विचारों के बारे में यहां पर संक्षेप में चर्चा की गई है
डिफ्यूजन आफ इनोवेशन विकास का एक सिद्धान्त है जो कि यह बताने का प्रयास करता है कि किसी प्रकार के नये आइडिया किस दर से , कैसे एवं क्यो किसी समाज की सभ्यता संस्कृति में फैलता है। संचार के प्रोफेसर ई.एम. रोजर इस सिद्धान्त के प्रणेता रहे हैं। उनकी लिखी पुस्तक डिफ्यूजन आफ इनोवेशन पहली बार 1962 में प्रकाशित हुई। डिफ्यूजन वह प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत नये आइडिया को एक निश्चितअवधि तक निश्चित माध्यम चैनल से किसी सामाजिक सिस्टम के लोगों के बीच प्रसारित किया जाता है। Media in development
डिफ्यूजन आफ इनोवेशन सिद्धान्त समय के साथ विस्तृत भी हुआ। रोजर ने नये प्रकार के आइडिया के प्रसार के सम्बन्ध में चार तत्वों की कल्पना की थी। ये थे इनोवेशन, कम्युनिकेशन चैनल ,समय एवं सोशल सिस्टम । इस सिद्धान्त की सफलता का दारोमदार काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि किस प्रकार के नये आइडिया को विस्तृत रूप में ग्रहण किया जाना चाहिए। नये आइडिया की स्वीकार्यता की दर में एक स्थित वह आती है जिसमें कि यह उचित संख्या में लोगों तक पहुॅच जाती है। डिफ्यूजन की प्रक्रिया भिन्न भिन्न समाज, संस्कृति, वर्ग एवं क्षेत्र में भिन्न भिन्न प्रकार से होती है। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कौन ग्रहण कर रहा है और उनका इनोवेशन डिसीजन प्रोसेस क्या है। इसे ग्रहण करने वालों एडाप्टर को भी कई वर्गो में विज्ञाजित किया गया है।
नए विचार को ग्रहण करने के संदर्भ में अन्य संचार वैज्ञानिकों ने भी मीडिया की भूमिका को स्वीकार किया है । डेनियल लर्नर ने मोबिलिटी मल्टीप्लायर के रूप में मीडिया को देखा। इसका आशय यही है कि मीडिया किसी प्रकार के नये विचार को ग्रहण करने वाले लोगों में गुणात्मक ढंग से बढ़ोत्तरी करता है। इसी प्रकार से विल्बर श्रैम ने जनमाध्यमों मैजिक मल्टीप्लायर के रूप में देखा। इसके अनुसार मीडिया बहुत ही तेजी के साथ काफी अधिक लोगों में नये प्रकार के विचार का प्रसार करता है।
डेनियल लर्नर द्वारा विकसित की गयी अवधारणा के अनुसार बेहतर जीवन प्रदान करने में मीडिया एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उत्पादकता , साक्षरता , शहरीकरण एवं समझ बढ़ाने में योगदान करता है, जिससे कि लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आता है। उसने अपनी पुस्तक -द पासिंग आफ ट्रेडीशनल सोसाइटी, में उन्होने कहा है कि उत्पादकता , साक्षरता , शहरीकरण में वृद्धि मात्र से तब तक बदलाव संभव नही है जब तक कि मीडिया लोगों में बदलाव के लिए चाह नही उत्पन्न करती है। इस प्रकार उन्होने में विकास में मीडिया की एक सक्रिय भूमिका की पहचान की , जिसके माध्यम से लोगों में बेहतर जीवन षैली अपनाने की चाह पैदा होती है। Media in development
डेनियल लर्नर की भाॅति विल्बर श्रैम ने तीसरी दुनिया के विकास कार्य की प्रक्रिया में काफी महत्वपूण कार्य किया है। उनकी “मास मीडिया एवं नेशनलडेवलपमेन्ट” नाम की पुस्तक में विकास एवं मीडिया की भूमिका के बारे में काफी विस्तार के साथ चर्चा की गयी है। डेनियल लर्नर ने जनमाध्यमों के उपयोग एवं आधुनिकीकरण की महत्वपूर्ण विचार सामने प्रस्तुत किया। आधुनिकीकरण को उसने पश्चिमीकरण से जोड़ करके देखा। किन्तु कई देशों ने राजनीतिक कारणों से पश्चिम के देशों से स्वयं को दूर रखते रहे हैं। इसलिए आधुनिकीकरण शब्द कहीं ज्यादा उपयोग में लाये जाने लगा। इस प्रकार उसने पारम्परिक सामन्ती शासन से हट करके आधुनिक औद्योगिक समाज की कल्पना किया। अपने विकास माडल में उसने अनेक परिकल्पना की। Media in development
– ऐसे लोगों का समूह जो कि मानसिक स्तर पर आसानी के साथ अपने व्यक्तिगत जीवन में बदलाव के प्रति झुकाव रखते हो और उसके प्रति तैयार हो। – एक बहुत ही शक्तिशाली जनमाध्यम जो कि सामाजिक एवं व्यक्तिगत बदलाव के लिए आधुनिकीकरण के अनुकूल नये विचार एवं दृष्टिकोण के प्रचार एवं प्रसार में सहायक हो। – आधुनिक समाज स्थापित करने के लिए शहरीकरण , साक्षरता , मीडिया एक्पोजर , एवं राजनीतिक एवं आर्थिक सहभागिता ।
डेनियल लर्नर ने यह महसूस किया कि पारम्परिक समाज की विकास में सहभागिता काफी कम होती है। उसका तुलना में आधुनिक समाज की भागीदारी काफी अधिक होती है। पारम्परिक समाज एवं आधुनिक समाज की जीवन के तौर तरीके में काफी भिन्नता है। पारम्परिक समाज एक बहुत ही सीमित दायरे में रह करके अपने जीवन को जीता है और वह अपनी बहुत ही कम आवश्यकता भी रखे हुए होता है। दूसरी तरफ, आधुनिक समाज के किया कलाप काफी अधिक सक्रियता वाले एवं भागीदारीपूर्ण ढंग से होते हैं। इसमें आधुनिक शिक्षा दी जाती है। ये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में काफी बढ़ चढ़ करके भाग लेते हैं।
भारतीय संचार वैज्ञानिक लक्षमण राव 1963 विकास प्रक्रिया के सन्दर्भ में अपने शोध कार्य के माध्यम से इस बात को साबित किया कि नये प्रकार के आइडिया, विचार उनके विकास में सहायता करते हैं, वे बेहतर जीवन अपनाने के लिए प्रेरित होते है। इस सन्दर्भ में उन्होने दो गाॅंवों का चयन करके यह दिखाने का प्रयास किया कि जिस गाॅव में शहर से जोड़ने वाली सड़क की सुविधा थी, वहाॅ आधुनिकता की प्रकिया आरम्भ हो गयी और सड़क के कारण लोग नये विचार एवं जीवन षैली को अपना सके और मीडिया इस कार्य को से प्रभावित हुए और वे शहरी जीवन को देखने में सक्षम हो सके। इससे उनके मस्तिष्क में नये विचार आने लगे और वे बदलाव के लिए तैयार हुए । इस प्रकार के नए आइडिया पहले उच्च वर्ग के लोगों के पास पहुॅचा फिर वह धीरे धीरे नीचे भी पहुॅचने लगा। मालकोटे एवं स्टीव ने यह पाया कि सूचना की मात्रा एवं गुणवत्ता जिसने कि कोठारू गाॅंव में बदलाव ले आया उसमें नयी सड़क एवं जनमाध्यमों ने बाहर से आधुनिक विचार गाॅव के लोगों तक पहुॅचाया। उनमें शिक्षा पाने के प्रति काफी अधिक उत्सुकता रही है। Media in development
डिफ्यूजन आफ इन्नोवेशन के शोध ने स्थानीय स्तर पर आधुनिकीकरण में संचार के महत्व को स्थापित किया। किन्तु समय के साथ यह सिद्धान्त बहुत उपयोगी नही हो पाया। धीरे धीरे इसकी जगह पर सोशल मार्केटिंग का उद्भव हुआ जो कि विकास एवं सामाजिक बदलाव के दूसरे ढंग के माडल प्रस्तुत किये। सोशल मार्केटिंग विकास के लिए एक ऐसा अप्रोच रहा है जिसने कि डिफ्फयूजन आफ इनोवेशन के गुणों को काफी हद तक ले करके आगे बढ़ा।
