• Home
  • Media News & Updates
  • Media Study Material
    • Communication
    • Radio
    • Photography
    • TV
    • Communication Theory & Models
    • Print Media
    • Graphic Design
    • Film Studies & Production
    • PR & Advertisement
    • Development Communication
    • Media Law
  • UGC JRF NET
  • Digital Media Technology
  • Editorial
  • Students Corner
Wednesday, November 4, 2026
Media Study World
No Result
View All Result
  • Home
  • Media News & Updates
  • Media Study Material
    • All
    • Communication
    • Communication Theory & Models
    • Development Communication
    • Film Studies & Production
    • Graphic Design
    • Human Communication
    • Media Law
    • Photography
    • PR & Advertisement
    • Print Media
    • Radio
    • research
    • TV
    Crane shot क्रेन शॉट क्या होता है ?

    Recent Changes in Media Laws

    Video editing – Basic principles

    Technique of Radio Editing

    Art of Radio Recording

    Elements of Editing in Photography

    A Practical Guide to Smartphone Photography: Technique, Ethics and Law

    Ethics in Photography

    Format for Writing Radio Advertising Copy

    Format for Writing Radio Drama

    Changing Setup of Modern Newsroom

    दृश्य भाषा की उत्पत्ति एवं विकास

    हमारे जीवन में फोटोग्राफी का महत्व

    दृश्य भाषा की प्रमुख विशेषताएँ: चित्र, रंग और संकेत कैसे करते हैं संचार

    Mechanical Shots in Video production

    Trending Tags

      • Communication
      • Radio
      • Photography
      • TV
      • Communication Theory & Models
      • Print Media
      • Graphic Design
      • Film Studies & Production
      • PR & Advertisement
      • Development Communication
      • Media Law
    • UGC JRF NET
    • Digital Media Technology
    • Editorial
    • Students Corner
    • Home
    • Media News & Updates
    • Media Study Material
      • All
      • Communication
      • Communication Theory & Models
      • Development Communication
      • Film Studies & Production
      • Graphic Design
      • Human Communication
      • Media Law
      • Photography
      • PR & Advertisement
      • Print Media
      • Radio
      • research
      • TV
      Crane shot क्रेन शॉट क्या होता है ?

      Recent Changes in Media Laws

      Video editing – Basic principles

      Technique of Radio Editing

      Art of Radio Recording

      Elements of Editing in Photography

      A Practical Guide to Smartphone Photography: Technique, Ethics and Law

      Ethics in Photography

      Format for Writing Radio Advertising Copy

      Format for Writing Radio Drama

      Changing Setup of Modern Newsroom

      दृश्य भाषा की उत्पत्ति एवं विकास

      हमारे जीवन में फोटोग्राफी का महत्व

      दृश्य भाषा की प्रमुख विशेषताएँ: चित्र, रंग और संकेत कैसे करते हैं संचार

      Mechanical Shots in Video production

      Trending Tags

        • Communication
        • Radio
        • Photography
        • TV
        • Communication Theory & Models
        • Print Media
        • Graphic Design
        • Film Studies & Production
        • PR & Advertisement
        • Development Communication
        • Media Law
      • UGC JRF NET
      • Digital Media Technology
      • Editorial
      • Students Corner
      No Result
      View All Result
      Media Study World
      No Result
      View All Result
      Home Media Study Material Media Law

      Audit Bureau of Circulation

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      1 year ago
      in Media Law, Media Study Material
      0


      ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन्स (ABC)

      समाचारपत्रों और पत्रिकाओं की प्रसार संख्या की जाँच और प्रमाणन

      1. परिचय

      Audit Bureau of Circulation भारत में अनेक भाषाओं में बड़ी संख्या में समाचारपत्र और पत्रिकाएँ प्रकाशित होती हैं। ऐसे में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि किसी समाचारपत्र की वास्तव में कितनी प्रतियाँ बिकती या वितरित होती हैं। यह जानकारी विशेष रूप से विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और प्रकाशकों के लिए महत्वपूर्ण होती है। समाचारपत्रों और पत्रिकाओं की प्रसार संख्या की स्वतंत्र रूप से जाँच और प्रमाणन करने के लिए ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन्स (ABC) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

      2. एबीसी क्या है?

      ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन्स, जिसे संक्षेप में एबीसी कहा जाता है, एक स्वैच्छिक और गैर-लाभकारी संस्था है। भारत में इसकी स्थापना 1948 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य समाचारपत्रों और पत्रिकाओं की प्रसार संख्या की जाँच कर विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध कराना है। इसमें मुख्य रूप से प्रकाशक, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसियाँ सदस्य होते हैं।

      3. एबीसी की आवश्यकता क्यों पड़ी?

      पहले विज्ञापनदाता के लिए यह पता लगाना कठिन था कि किसी समाचारपत्र द्वारा बताई गई प्रसार संख्या वास्तव में सही है या नहीं। यदि कोई समाचारपत्र यह दावा करता था कि उसकी लाखों प्रतियाँ बिकती हैं, तो उस दावे को स्वतंत्र रूप से जाँचने की आवश्यकता होती थी। इसी कारण ऐसी संस्था की जरूरत महसूस हुई जो प्रकाशक के दावे से अलग होकर उसकी प्रसार संख्या की निष्पक्ष जाँच करे। एबीसी इसी आवश्यकता को पूरा करता है।

      4. Audit Bureau of Circulation एबीसी का मुख्य कार्य

      एबीसी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य समाचारपत्रों और पत्रिकाओं की प्रसार संख्या की जाँच के लिए एक समान और निश्चित प्रक्रिया तैयार करना है। सदस्य प्रकाशन अपने वितरण और बिक्री से संबंधित आँकड़े प्रस्तुत करते हैं। इन आँकड़ों की स्वतंत्र जाँच के बाद एबीसी योग्य बिक्री की औसत संख्या को प्रमाणित करता है।

      5. छपी हुई प्रतियाँ और प्रसार संख्या एक नहीं हैं

      विद्यार्थियों को यह अंतर विशेष रूप से समझना चाहिए कि किसी समाचारपत्र की छपी हुई प्रतियों की संख्या और उसकी प्रमाणित प्रसार संख्या एक ही बात नहीं है। मान लीजिए किसी समाचारपत्र की एक लाख प्रतियाँ छापी गईं, लेकिन सभी प्रतियाँ वास्तव में नहीं बिकीं। ऐसी स्थिति में केवल एक लाख प्रतियाँ छपने के आधार पर उसकी प्रसार संख्या एक लाख नहीं मानी जाएगी। एबीसी निर्धारित नियमों के आधार पर वास्तविक योग्य बिक्री की जाँच करता है।

      6. Audit Bureau of Circulation प्रसार संख्या की जाँच कैसे होती है?

      एबीसी के सदस्य प्रकाशन अपनी बिक्री और वितरण से संबंधित अभिलेख तैयार करते हैं। इनकी जाँच सनदी लेखाकारों की स्वतंत्र और सूचीबद्ध संस्थाओं द्वारा की जाती है। जाँच में केवल अंतिम बिक्री संख्या नहीं देखी जाती, बल्कि छपाई, वितरण, उत्पादन और वित्तीय अभिलेखों का भी परीक्षण किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रकाशक द्वारा प्रस्तुत आँकड़े वास्तविक अभिलेखों से मेल खाते हैं।

      7. हर छह महीने में प्रमाणन Audit Bureau of Circulation

      एबीसी सामान्यतः वर्ष को दो जाँच अवधियों में बाँटकर सदस्य प्रकाशनों की प्रसार संख्या प्रमाणित करता है। पहली अवधि जनवरी से जून और दूसरी जुलाई से दिसंबर तक होती है। निर्धारित नियमों और जाँच प्रक्रिया का पालन करने वाले प्रकाशनों को उनकी योग्य बिक्री के आधार पर प्रमाणपत्र दिया जाता है। https://www.youtube.com/watch?v=ESGd_lFCm8A&t=244s

      8. औचक जाँच की भी व्यवस्था

      एबीसी केवल नियमित जाँच पर निर्भर नहीं रहता। उसके पास अलग से लेखा परीक्षकों की व्यवस्था होती है, जिनके माध्यम से आवश्यकता पड़ने पर औचक जाँच और दोबारा जाँच भी कराई जा सकती है। इसका उद्देश्य गलत या बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए प्रसार आँकड़ों को रोकना और प्रमाणन की विश्वसनीयता बनाए रखना है।

      9. केवल कुल संख्या नहीं, वितरण क्षेत्र भी महत्वपूर्ण

      एबीसी से केवल यह जानकारी नहीं मिलती कि किसी समाचारपत्र की कुल कितनी प्रतियाँ बिकती हैं। उसके माध्यम से राज्य, जिला और शहर के अनुसार वितरण की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। विज्ञापनदाता के लिए यह बहुत उपयोगी है, क्योंकि उसे केवल यह नहीं जानना होता कि समाचारपत्र कितना बिकता है, बल्कि यह भी जानना होता है कि वह किन क्षेत्रों में अधिक पहुँचता है।

      10. एबीसी के सदस्य

      एबीसी में केवल समाचारपत्र और पत्रिकाएँ ही शामिल नहीं हैं। इसमें प्रकाशक, विज्ञापन एजेंसियाँ, विज्ञापनदाता तथा समाचार और विज्ञापन क्षेत्र से संबंधित कुछ संस्थाएँ और संगठन भी सदस्य हैं। वर्तमान वेबसाइट पर दिए गए आँकड़ों के अनुसार इसमें 562 दैनिक समाचारपत्र, 107 साप्ताहिक प्रकाशन, 50 पत्रिकाएँ, 125 विज्ञापन एजेंसियाँ, 45 विज्ञापनदाता तथा 22 अन्य संबंधित एजेंसियाँ और संगठन शामिल हैं। ये आँकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।

      11. विज्ञापनदाताओं के लिए एबीसी Audit Bureau of Circulation का महत्व

      किसी विज्ञापनदाता को विज्ञापन देने से पहले यह जानना होता है कि उसका विज्ञापन कितने लोगों और किन क्षेत्रों तक पहुँच सकता है। मान लीजिए किसी कंपनी को उत्तर प्रदेश में अपने उत्पाद का विज्ञापन देना है। उसके सामने दो समाचारपत्र हैं और दोनों स्वयं को सबसे अधिक लोकप्रिय बताते हैं। ऐसी स्थिति में एबीसी द्वारा प्रमाणित प्रसार आँकड़े यह समझने में सहायता करते हैं कि किस समाचारपत्र की वास्तविक बिक्री और वितरण उसके लिए अधिक उपयोगी हो सकता है।

      12. एबीसी के आँकड़े अधिक विश्वसनीय क्यों माने जाते हैं?

      एबीसी द्वारा दिए गए आँकड़े केवल प्रकाशक के दावे, राय या अनुमान पर आधारित नहीं होते। वे निर्धारित नियमों के अनुसार स्वतंत्र सनदी लेखाकार संस्थाओं द्वारा की गई जाँच पर आधारित होते हैं। इस स्वतंत्र जाँच के कारण प्रकाशक, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसी के बीच विश्वास बढ़ता है।

      13. एबीसी Audit Bureau of Circulation की प्रबंधन व्यवस्था

      एबीसी का प्रमुख नीति-निर्माण निकाय प्रबंधन परिषद है। इसमें प्रकाशकों, विज्ञापन एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसकी संरचना में सामान्यतः 8 निर्वाचित प्रकाशक प्रतिनिधि, 4 विज्ञापन एजेंसी प्रतिनिधि और 4 विज्ञापनदाता प्रतिनिधि होते हैं। इस प्रकार संस्था के संचालन में केवल प्रकाशकों का ही नहीं, बल्कि विज्ञापन क्षेत्र के दूसरे पक्षों का भी प्रतिनिधित्व रहता है।

      14. अध्यक्ष और प्रबंधन परिषद

      प्रबंधन परिषद संस्था की प्रमुख नीतियों और कार्यप्रणाली के बारे में निर्णय करती है। अध्यक्ष का पद प्रकाशक और गैर-प्रकाशक पक्ष के वरिष्ठ सदस्यों के बीच बदलने की व्यवस्था है। संस्था की प्रतिदिन की प्रशासनिक गतिविधियाँ सचिवालय द्वारा प्रबंधन परिषद के निर्देशों के अनुसार संचालित की जाती हैं।

      15. एबीसी विज्ञापन की दर निर्धारित नहीं करता

      यह बात विशेष रूप से स्पष्ट करनी चाहिए कि एबीसी किसी समाचारपत्र की विज्ञापन दर तय नहीं करता। उसका काम प्रमाणित प्रसार आँकड़े उपलब्ध कराना है। विज्ञापन की दर कई दूसरे कारणों से तय होती है। हाँ, समाचारपत्र की प्रमाणित प्रसार संख्या विज्ञापनदाता के लिए यह निर्णय लेने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि उसे किस समाचारपत्र में विज्ञापन देना चाहिए और कितना धन खर्च करना चाहिए।

      16. प्रसार संख्या और पाठक संख्या में अंतर

      प्रसार संख्या और पाठक संख्या भी अलग-अलग हैं। प्रसार संख्या का संबंध समाचारपत्र या पत्रिका की वितरित अथवा योग्य रूप से बेची गई प्रतियों से होता है। दूसरी ओर पाठक संख्या यह बताती है कि प्रकाशन को वास्तव में कितने लोग पढ़ते हैं। उदाहरण के लिए घर में खरीदा गया एक समाचारपत्र चार-पाँच सदस्य पढ़ सकते हैं। इसलिए एक प्रति की बिक्री का अर्थ केवल एक पाठक नहीं है।

      17. डिजिटल युग में भी Audit Bureau of Circulation एबीसी का महत्व

      आज समाचार वेबसाइट, मोबाइल और सामाजिक माध्यमों पर भी पढ़े जाते हैं। इसके बावजूद मुद्रित समाचारपत्रों के विज्ञापन बाजार में प्रमाणित प्रसार संख्या का महत्व बना हुआ है। विशेष रूप से ऐसे विज्ञापनदाता जो किसी निश्चित शहर, जिले या राज्य के पाठकों तक पहुँचना चाहते हैं, उनके लिए क्षेत्रवार प्रमाणित वितरण की जानकारी उपयोगी होती है।

      18. एबीसी की कार्यप्रणाली को उदाहरण से समझें

      मान लीजिए कोई दैनिक समाचारपत्र दावा करता है कि उसकी दो लाख प्रतियाँ बिकती हैं। एबीसी केवल इस दावे को स्वीकार नहीं करेगा। समाचारपत्र के छपाई, बिक्री, वितरण, उत्पादन और वित्तीय अभिलेखों की निर्धारित प्रक्रिया से जाँच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि कितनी प्रतियाँ वास्तव में योग्य बिक्री की शर्तों को पूरा करती हैं। जाँच पूरी होने के बाद ही उसकी औसत योग्य बिक्री को प्रमाणित किया जाएगा।

      एबीसी की पूरी प्रक्रिया एक क्रम में

      प्रकाशक द्वारा आँकड़े देना → अभिलेखों की स्वतंत्र जाँच → बिक्री एवं वितरण का सत्यापन → योग्य बिक्री की गणना → छह महीने की अवधि का प्रमाणन → क्षेत्रवार वितरण की जानकारी → विज्ञापनदाता एवं विज्ञापन एजेंसियों द्वारा उपयोग

      निष्कर्ष Audit Bureau of Circulation

      इस प्रकार ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन्स का मुख्य कार्य किसी समाचारपत्र को लोकप्रिय घोषित करना या उसकी विज्ञापन दर तय करना नहीं है। उसका वास्तविक कार्य सदस्य समाचारपत्रों और पत्रिकाओं की प्रसार संख्या को निश्चित नियमों, स्वतंत्र जाँच और प्रमाणन की प्रक्रिया के माध्यम से विश्वसनीय बनाना है। इसलिए एबीसी प्रकाशक, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसी—तीनों के बीच भरोसा स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। Copyright Act Copyright Act UGC net-exam MCQ

      ShareTweet
      Dr. Arvind Kumar Singh

      Dr. Arvind Kumar Singh

      Related Posts

      Crane shot क्रेन शॉट क्या होता है ?
      Media Law

      Recent Changes in Media Laws

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      November 2, 2026
      0

      भारत में Media Laws में हाल के प्रमुख बदलाव 2023 से 2026 तक के महत्वपूर्ण परिवर्तन Recent Changes in Media...

      Read more

      Exceptions to the Law of Defamation

      October 30, 2026

      Working Journalist Act

      October 29, 2026

      Theoretical Framework of New Media

      October 29, 2026

      Technique of Radio Editing

      November 2, 2026

      Art of Radio Recording

      October 29, 2026
      Next Post

      RTI 2005

      Second Press Commission Recommendation द्वितीय प्रेस आयोग की सिफारिशें

      • About us
      • Contact
      • Home
      • Privacey

      No Result
      View All Result
      • Home
      • Media News & Updates
      • Media Study Material
        • Communication
        • Radio
        • Photography
        • TV
        • Communication Theory & Models
        • Print Media
        • Graphic Design
        • Film Studies & Production
        • PR & Advertisement
        • Development Communication
        • Media Law
      • UGC JRF NET
      • Digital Media Technology
      • Editorial
      • Students Corner