
Oblique / Dutch Angle ऑब्लिक / डच एंगल
Oblique / Dutch Angle ऑब्लिक या डच एंगल वह कैमरा एंगल होता है जिसमें कैमरा जानबूझकर सीधा न रखकर तिरछा (झुका हुआ) रखा जाता है। इस एंगल में क्षितिज रेखा सीधी न होकर तिरछी दिखाई देती है। इसका उद्देश्य दृश्य को संतुलित, अस्थिर या असामान्य दिखाना होता है, ताकि दर्शक के मन में तनाव, भ्रम या बेचैनी का भाव उत्पन्न हो।
2. ऑब्लिक / डच एंगल की विशेषताएँ (Characteristics of Oblique / Dutch Angle)
इस एंगल की प्रमुख विशेषता तिरछी फ्रेमिंग है। दृश्य सामान्य और संतुलित न लगकर थोड़ा झुका हुआ दिखाई देता है। इससे दृश्य में अस्थिरता और मानसिक विचलन का संकेत मिलता है। यह एंगल दर्शक को यह एहसास कराता है कि दृश्य में कुछ “सामान्य” नहीं है। रेखाएँ और संरचनाएँ असामान्य दिशा में झुकी हुई प्रतीत होती हैं, जिससे दृश्य का मनोवैज्ञानिक प्रभाव बढ़ जाता है।
3. ऑब्लिक / डच एंगल का महत्व (Importance of Oblique / Dutch Angle)
डच एंगल का महत्व दृश्य में मनोवैज्ञानिक प्रभाव उत्पन्न करने में है। यह एंगल दर्शक को भावनात्मक रूप से असहज करता है और कहानी के तनाव को बढ़ाता है। किसी पात्र की मानसिक स्थिति, डर, भ्रम या असंतुलन को बिना संवाद के दर्शाने में यह एंगल अत्यंत प्रभावी होता है। यह दृश्य को साधारण से अलग और यादगार बनाता है।
4. ऑब्लिक / डच एंगल कब और कहाँ प्रयोग करें (When and Where to Use Oblique / Dutch Angle)
इस एंगल का प्रयोग तब किया जाता है जब कहानी में तनाव, रहस्य, डर, मानसिक अस्थिरता या संकट दिखाना हो। इसका उपयोग थ्रिलर, हॉरर, अपराध, मनोवैज्ञानिक फिल्मों और सपने या भ्रम वाले दृश्यों में किया जाता है। समाचार या गंभीर घटनाओं की प्रस्तुति में भी सीमित रूप से इसका प्रयोग किया जा सकता है, ताकि स्थिति की गंभीरता और असंतुलन को दर्शाया जा सके।
5. ऑब्लिक / डच एंगल के दोष (Demerits of Oblique / Dutch Angle)
इस एंगल का सबसे बड़ा दोष यह है कि अत्यधिक प्रयोग से दर्शक भ्रमित या थका हुआ महसूस कर सकता है। यदि हर दृश्य तिरछा दिखाया जाए तो कहानी की विश्वसनीयता कम हो जाती है। गलत संदर्भ में प्रयोग करने पर दृश्य हास्यास्पद या बनावटी भी लग सकता है। यह एंगल लंबे संवाद या सूचना प्रधान दृश्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
ऑब्लिक / डच एंगल एक प्रभावशाली कैमरा तकनीक है, जिसका प्रयोग दृश्य में तनाव, असंतुलन और मनोवैज्ञानिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। सही संदर्भ, सीमित मात्रा और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इसका प्रयोग कहानी को गहराई और प्रभाव प्रदान करता है। किंतु अति प्रयोग या गलत स्थिति में उपयोग करने से दृश्य की स्वाभाविकता और समझ दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए डच एंगल का प्रयोग सोच-समझकर और संतुलन के साथ किया जाना चाहिए।
Tilt Movement of Camera What is close up shot ?