बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, मेटा, भारतीय साइबर पोर्टल, साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री की सूचना भारतीय एजेंसियों तक तेजी से पहुँचाने की पहल

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, मेटा, भारतीय साइबर पोर्टल, साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध Children and Cyber Crime “बच्चों को साइबर अपराध से बचाना – अभिभावकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी”
सितंबर 2026 में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने भारत में बच्चों से जुड़े यौन शोषण के मामलों और ऐसी आपत्तिजनक सामग्री की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल को देने की व्यवस्था पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य बच्चों के विरुद्ध होने वाले ऑनलाइन अपराधों की जानकारी भारतीय कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक अधिक सीधे और तेजी से पहुँचाना है। मेटा ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वह ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई में सरकार के साथ सहयोग करेगी।
मेटा के अंतर्गत आने वाले फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सामग्री साझा करते हैं। बच्चों से संबंधित यौन शोषण की सामग्री अत्यंत गंभीर अपराध है और ऐसी सामग्री को बनाना, रखना, साझा करना या प्रसारित करना बच्चों की सुरक्षा और सम्मान के लिए गंभीर खतरा है। मेटा ऐसी सामग्री की पहचान करने, उसे हटाने और संबंधित मामलों की जानकारी देने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं का उपयोग करती है। भारत में आई4सी द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करने के लिए भारत सरकार का आधिकारिक माध्यम है। इस पोर्टल पर महिलाएं और बच्चे से संबंधित साइबर अपराधों की शिकायत भी की जा सकती है।
पहले मेटा द्वारा बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण से संबंधित मामलों की जानकारी मुख्य रूप से अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन को दी जाती थी। सितंबर 2026 में भारत के लिए आई4सी के साइबर अपराध पोर्टल को सीधे सूचना देने की व्यवस्था सामने आने से भारतीय एजेंसियों तक संबंधित जानकारी पहुँचाने का एक सीधा माध्यम उपलब्ध हुआ है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पहले की सभी व्यवस्थाएँ समाप्त हो गई हैं, बल्कि भारत से संबंधित मामलों में भारतीय साइबर अपराध व्यवस्था से सीधे जुड़ने का मार्ग उपलब्ध हुआ है।
एजेंसियों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है https://cybercrime.gov.in/
भारतीय कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी ऑनलाइन अपराध की सूचना समय पर मिलने से उसके संबंध में आवश्यक जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, किसी शिकायत का दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति को अपराधी सिद्ध नहीं करता। शिकायत के बाद संबंधित एजेंसियाँ उपलब्ध जानकारी और प्रमाणों के आधार पर जांच करती हैं तथा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करती हैं।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा इसलिए आवश्यक है क्योंकि आज बच्चे सामाजिक माध्यमों, ऑनलाइन खेलों, संदेश भेजने वाले माध्यमों और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते हैं। इन माध्यमों पर अनजान लोगों द्वारा संपर्क करना, बहला-फुसलाना, निजी जानकारी प्राप्त करना, डराना-धमकाना या अन्य प्रकार से शोषण करने का खतरा हो सकता है। इसलिए बच्चों को यह समझाना आवश्यक है कि वे अनजान व्यक्तियों से सावधान रहें, अपनी निजी जानकारी साझा न करें और किसी असहज या संदिग्ध घटना की जानकारी तुरंत माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को दें।
संदिग्ध सामग्री की राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत
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यदि किसी व्यक्ति को इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित संदिग्ध सामग्री दिखाई देती है, तो उसे स्वयं उस सामग्री की जांच करने या उसे दूसरों तक पहुँचाने के बजाय राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए। संबंधित सामाजिक माध्यम के शिकायत विकल्प का भी उपयोग किया जा सकता है। ऐसी सामग्री को डाउनलोड करना, सुरक्षित रखना, साझा करना, आगे भेजना या दोबारा प्रकाशित करना बिल्कुल नहीं चाहिए। किसी बच्चे की तस्वीर, नाम, पता, विद्यालय या अन्य पहचान संबंधी जानकारी को सार्वजनिक करना भी उचित नहीं है। संवेदनशील सामग्री को फैलाने के बजाय उचित सरकारी या कानून लागू करने वाली संस्था को इसकी जानकारी देना अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार तरीका है।
बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सामाजिक माध्यम चलाने वाली कंपनियों, सरकारी संस्थाओं, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, माता-पिता, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका है। समय पर पहचान, उचित शिकायत, बच्चों की निजी जानकारी की सुरक्षा और संदिग्ध सामग्री का प्रसार रोकना बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने के महत्वपूर्ण उपाय हैं।


