
Copyright law कॉपीराइट क्या है?—परिभाषा, अर्थ, प्रकार और भारत में कानून
परिचय
Copyright law हम प्रतिदिन पुस्तकें, समाचार, तस्वीरें, संगीत, फिल्में, वीडियो, चित्र, संगणक कार्यक्रम और इंटरनेट सामग्री देखते तथा उपयोग करते हैं। इन रचनाओं को बनाने में लेखक या कलाकार का ज्ञान, समय, श्रम और रचनात्मकता लगती है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को उनकी रचना मनमाने ढंग से नकल करने या व्यावसायिक रूप से उपयोग करने का अधिकार नहीं होता। रचनाकार के इसी हित की रक्षा करने वाली कानूनी व्यवस्था को कॉपीराइट कहा जाता है।
Definition of Copyright law कॉपीराइट की परिभाषा
कॉपीराइट यानी प्रतिलिप्याधिकार, किसी मौलिक रचना के रचनाकार या अधिकार-स्वामी को कानून द्वारा दिया गया विशेष अधिकार है। इसके अंतर्गत वह अपनी रचना की प्रतियाँ बनाने, प्रकाशित करने, प्रस्तुत करने, रूपांतरित करने, जनता तक पहुँचाने और उसके उपयोग की अनुमति देने या रोकने का निर्णय ले सकता है। भारत में कॉपीराइट संबंधी प्रमुख कानून कॉपीराइट अधिनियम, 1957 है, जिसका विस्तार पूरे भारत में है। indiacode.nic.in
कॉपीराइट का सरल अर्थ
सरल शब्दों में, यदि किसी व्यक्ति ने अपनी मौलिक सोच और मेहनत से कोई लेख, कविता, तस्वीर, चित्र, गीत, फिल्म या अन्य रचना बनाई है, तो उस रचना पर सामान्यतः उसका कानूनी अधिकार होता है। कोई दूसरा व्यक्ति उसकी अनुमति के बिना उस रचना की नकल करके उसे अपने नाम से प्रकाशित या बेच नहीं सकता।
कॉपीराइट किसी विचार मात्र की नहीं, बल्कि उस विचार की मौलिक अभिव्यक्ति की रक्षा करता है। उदाहरण के लिए, “पर्यावरण संरक्षण” एक सामान्य विचार है और इस पर कोई भी लिख सकता है। लेकिन किसी लेखक द्वारा इस विषय पर लिखा गया विशेष लेख, बनाई गई तस्वीर या निर्मित वृत्तचित्र उसकी संरक्षित रचना हो सकती है।
Objectives of Copyright law कॉपीराइट का उद्देश्य
कॉपीराइट का प्रमुख उद्देश्य रचनाकारों के बौद्धिक श्रम की रक्षा करना और उन्हें अपनी रचना से आर्थिक तथा सामाजिक लाभ प्राप्त करने का अवसर देना है। यह साहित्य, कला, पत्रकारिता, फोटोग्राफी, संगीत, फिल्म और डिजिटल सामग्री के निर्माण को प्रोत्साहित करता है। साथ ही, कानून जनहित को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, शोध, समीक्षा और समाचार जैसे कुछ उद्देश्यों के लिए सीमित उपयोग की अनुमति भी देता है।
Copyright law कॉपीराइट किन रचनाओं पर मिलता है?
भारतीय कॉपीराइट कानून के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित रचनाएँ सुरक्षित हो सकती हैं:
- साहित्यिक रचनाएँ: पुस्तक, लेख, कविता, समाचार-सामग्री, शोध-पत्र, सारणी, डेटाबेस और संगणक कार्यक्रम।
- नाटकीय रचनाएँ: नाटक, पटकथा, संवाद, अभिनय-रचना और नृत्य-संरचना।
- संगीतात्मक रचनाएँ: संगीत की मूल धुन और उसकी स्वर-रचना।
- कलात्मक रचनाएँ: चित्रकला, रेखाचित्र, मूर्ति, वास्तु-रचना, मानचित्र, आलेख और फोटोग्राफ।
- चलचित्र: फिल्म, वृत्तचित्र, लघु फिल्म, दृश्य कार्यक्रम और अन्य चलचित्र।
- ध्वनि-रिकॉर्डिंग: रिकॉर्ड किए गए गीत, भाषण, संवाद, पॉडकास्ट और अन्य ध्वनि सामग्री।
कॉपीराइट संरक्षण सामान्यतः रचना के मौलिक होने और किसी व्यक्त रूप में सामने आने पर मिलता है। केवल सामान्य तथ्य, समाचार की घटना, विचार या सिद्धांत अपने आप कॉपीराइट से सुरक्षित नहीं होते।
Copyright law कॉपीराइट के अंतर्गत मिलने वाले अधिकार
1. आर्थिक अधिकार
आर्थिक अधिकार रचनाकार को अपनी रचना से आर्थिक लाभ प्राप्त करने का अवसर देते हैं। इनमें रचना की प्रतियाँ तैयार करना, प्रकाशित करना, बेचना, किराये पर देना, जनता के सामने प्रस्तुत करना, प्रसारित करना, अनुवाद करना और रूपांतरण तैयार करना शामिल हो सकता है। रचनाकार ये अधिकार किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को अनुज्ञप्ति अथवा लिखित समझौते के माध्यम से दे सकता है।
2. नैतिक अधिकार
नैतिक अधिकार रचनाकार की पहचान और प्रतिष्ठा की रक्षा करते हैं। रचनाकार को अपनी रचना के लेखक के रूप में पहचाने जाने का अधिकार होता है। वह रचना में किए गए ऐसे विरूपण, बदलाव या अनुचित प्रयोग का विरोध कर सकता है जिससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचे। अधिकारों का हस्तांतरण हो जाने के बाद भी लेखक के नैतिक अधिकार बने रह सकते हैं। copyright.gov.in
3. संबद्ध अधिकार Copyright Act
कुछ अधिकार मूल लेखक के अतिरिक्त कलाकारों, प्रसारण संस्थाओं और ध्वनि-निर्माताओं को भी प्राप्त होते हैं। इन्हें संबद्ध या पड़ोसी अधिकार कहा जाता है। उदाहरण के लिए, गीत लिखने वाले, संगीत तैयार करने वाले, गायक और ध्वनि रिकॉर्डिंग बनाने वाली संस्था के अधिकार अलग-अलग हो सकते हैं।
कॉपीराइट का स्वामी कौन होता है?
सामान्यतः रचना का लेखक या निर्माता उसका पहला कॉपीराइट स्वामी होता है। फोटोग्राफ के मामले में सामान्यतः उसे खींचने वाला फोटोग्राफर रचनाकार माना जाता है। लेकिन नौकरी, अनुबंध, समाचार-पत्र में रोजगार, सरकारी कार्य या किसी संस्था के लिए विशेष रूप से तैयार की गई सामग्री के मामले में स्वामित्व परिस्थितियों और समझौते के अनुसार अलग हो सकता है।
इसलिए व्यावसायिक फोटोग्राफी, पुस्तक प्रकाशन, फिल्म निर्माण और संस्थागत परियोजनाओं में लिखित अनुबंध आवश्यक है। अधिकारों का हस्तांतरण लिखित और हस्ताक्षरित होना चाहिए तथा उसमें अधिकार, अवधि, क्षेत्र और पारिश्रमिक जैसी बातें स्पष्ट होनी चाहिए। copyright.gov.in
भारत में कॉपीराइट कानून
भारत में कॉपीराइट की रक्षा मुख्य रूप से कॉपीराइट अधिनियम, 1957 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा की जाती है। इस अधिनियम में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। वर्ष 2012 का संशोधन डिजिटल तकनीक, इंटरनेट, कलाकारों के अधिकार, तकनीकी सुरक्षा उपायों और रॉयल्टी जैसे विषयों की दृष्टि से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण था। प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए कॉपीराइट नियम भी लागू होते हैं। copyright.gov.in
क्या कॉपीराइट का पंजीकरण जरूरी है?
कॉपीराइट प्राप्त करने के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। मौलिक रचना बनकर व्यक्त रूप में आने के साथ ही सामान्यतः उसका कॉपीराइट अस्तित्व में आ जाता है। फिर भी पंजीकरण लाभकारी हो सकता है, क्योंकि विवाद की स्थिति में कॉपीराइट पंजी में दर्ज विवरण प्रारंभिक कानूनी प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। copyright.gov.in
रचनाकार को अपनी मूल फाइलें, प्रारूप, तारीख, कैमरे की मूल फाइल, प्रकाशन अभिलेख, अनुबंध और भुगतान संबंधी प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए। ये सामग्री स्वामित्व सिद्ध करने में सहायक हो सकती है।
कॉपीराइट की अवधि
साहित्यिक, नाटकीय, संगीतात्मक और कलात्मक रचनाओं में सामान्यतः कॉपीराइट लेखक के जीवनकाल तक तथा उसकी मृत्यु के बाद अगले कैलेंडर वर्ष से 60 वर्ष तक रहता है। संयुक्त रचना में यह अवधि अंतिम जीवित लेखक की मृत्यु के आधार पर निर्धारित होती है।
चलचित्र, ध्वनि-रिकॉर्डिंग, सरकारी रचना, सार्वजनिक उपक्रम की रचना और कुछ अन्य श्रेणियों में सामान्यतः अवधि प्रकाशन के अगले कैलेंडर वर्ष से 60 वर्ष होती है। अलग-अलग प्रकार की रचनाओं में अवधि की गणना भिन्न हो सकती है। copyright.gov.in
कॉपीराइट का उल्लंघन क्या है?
जब कोई व्यक्ति अधिकार-स्वामी की अनुमति के बिना संरक्षित रचना की नकल करता है, उसे बेचता है, इंटरनेट पर डालता है, सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करता है या उसका अनुचित व्यावसायिक उपयोग करता है, तो यह कॉपीराइट उल्लंघन हो सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी वेबसाइट से तस्वीर उठाकर अपने विज्ञापन में लगाना, किसी लेखक का लेख अपने नाम से प्रकाशित करना, फिल्म की अवैध प्रतियाँ बेचना या भुगतान वाले पाठ्यक्रम की सामग्री को सार्वजनिक समूह में बाँटना उल्लंघन हो सकता है। केवल रचनाकार का नाम लिख देना हर स्थिति में पर्याप्त नहीं है; कई प्रयोगों के लिए अनुमति या उचित अनुज्ञप्ति भी चाहिए। copyright.gov.in
उचित उपयोग या फेयर डीलिंग
कॉपीराइट कानून कुछ सीमित परिस्थितियों में संरक्षित सामग्री के उचित उपयोग की अनुमति देता है। इनमें निजी उपयोग सहित शोध, आलोचना, समीक्षा और समसामयिक घटनाओं का समाचार-प्रतिवेदन जैसी स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। शिक्षा, न्यायिक कार्यवाही, पुस्तकालय और कुछ सुलभता संबंधी उपयोगों के लिए भी विशेष अपवाद दिए गए हैं। copyright.gov.in
लेकिन “शैक्षिक उद्देश्य” लिख देने से हर प्रकार की नकल वैध नहीं हो जाती। उपयोग का उद्देश्य, ली गई सामग्री की मात्रा, उसका स्वरूप और मूल रचना के आर्थिक हित पर पड़ने वाला प्रभाव महत्त्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए शक होने पर अनुमति लेना सुरक्षित रहता है।
उल्लंघन पर कानूनी उपाय
कॉपीराइट स्वामी उल्लंघन रोकने के लिए न्यायालय से निषेधाज्ञा, हर्जाना, लाभ का हिसाब और उल्लंघनकारी प्रतियों को जब्त या सुपुर्द करने जैसी राहत माँग सकता है। जानबूझकर किए गए कुछ उल्लंघन आपराधिक अपराध भी हो सकते हैं। अधिनियम की धारा 63 में सामान्यतः छह महीने से तीन वर्ष तक के कारावास और पचास हजार से दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है; हालांकि विशेष परिस्थितियों में न्यायालय अलग निर्णय कर सकता है। copyright.gov.in
फोटोग्राफी और कॉपीराइट
फोटोग्राफ एक कलात्मक रचना के रूप में कॉपीराइट से संरक्षित हो सकता है। सामान्यतः फोटोग्राफर को तस्वीर की प्रतिलिपि बनाने, प्रकाशित करने, प्रदर्शित करने और उपयोग की अनुमति देने का अधिकार मिलता है। यदि किसी व्यक्ति की तस्वीर ली गई है, तो फोटोग्राफर के कॉपीराइट के साथ उस व्यक्ति की निजता, गरिमा और सहमति का भी सम्मान आवश्यक है।
समाचार फोटोग्राफी में तस्वीर की सत्यता बनाए रखना विशेष रूप से जरूरी है। ऐसी काट-छाँट या डिजिटल फेरबदल नहीं करना चाहिए जिससे घटना का अर्थ बदल जाए। ऑनलाइन तस्वीर प्रयोग करने से पहले उसके अधिकार-स्वामी, उपयोग की शर्तें और अनुज्ञप्ति की जाँच करनी चाहिए।
Copyright law कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क में अंतर
कॉपीराइट मौलिक साहित्यिक, कलात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति की रक्षा करता है। पेटेंट किसी नवीन आविष्कार या तकनीकी प्रक्रिया से संबंधित होता है। ट्रेडमार्क किसी व्यवसाय के नाम, चिह्न, प्रतीक या पहचान की रक्षा करता है। इसलिए पुस्तक पर कॉपीराइट, नई मशीन पर पेटेंट और किसी कंपनी के विशिष्ट प्रतीक पर ट्रेडमार्क हो सकता है।
निष्कर्ष
कॉपीराइट रचनाकार की रचना, पहचान, प्रतिष्ठा और आर्थिक हितों की रक्षा करने वाला महत्त्वपूर्ण अधिकार है। यह हमें सिखाता है कि इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक तस्वीर, लेख, गीत या वीडियो उपयोग के लिए स्वतन्त्र नहीं होता। जिम्मेदार उपयोगकर्ता को स्रोत देना, आवश्यक अनुमति लेना, अनुज्ञप्ति की शर्तों का पालन करना और रचना को भ्रामक रूप में प्रस्तुत न करना चाहिए। इस प्रकार कॉपीराइट रचनाकार और समाज—दोनों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करता है।
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