
Point of View angle shot – पॉइंटऑफ़ व्यू एंगल
पॉइंट ऑफ़ व्यू एंगल वह कैमरा शॉट होता है जिसमें कैमरा किसी पात्र की आँखों की जगह से दृश्य रिकॉर्ड करता है। दर्शक वही देखता है जो पात्र देख रहा होता है। इस एंगल का उद्देश्य दर्शक को पात्र की दृष्टि और अनुभव के साथ सीधे जोड़ना होता है, ताकि दृश्य व्यक्तिगत और तात्कालिक लगे।
2. पॉइंटऑफ़व्यू एंगल की विशेषताएँ (Characteristics of Point of View angle shot)
इस एंगल की प्रमुख विशेषता व्यक्तिगत दृष्टिकोण है। कैमरा फ्रेम ऐसा होता है मानो दर्शक स्वयं दृश्य के भीतर मौजूद हो। अक्सर हाथ, दरवाज़ा, वस्तु या सामने खड़ा व्यक्ति उसी तरह दिखाई देता है जैसे किसी व्यक्ति की नज़र से दिखता है। कैमरा हल्का गतिशील हो सकता है, जिससे प्राकृतिक देखने का एहसास बढ़ता है।
3. पॉइंटऑफ़व्यू एंगल का महत्व (Importance of Point of View angle shot)
POV एंगल का महत्व दर्शक और कहानी के बीच सीधा भावनात्मक जुड़ाव बनाने में है। यह एंगल सहानुभूति, रोमांच या डर को तीव्र करता है, क्योंकि दर्शक स्वयं को पात्र की स्थिति में महसूस करता है। इससे दृश्य अधिक प्रभावशाली और यादगार बनते हैं।
4. पॉइंटऑफ़व्यू एंगल कब और कैसे प्रयोग करें (When and How toPoint of View angle shot)
इस एंगल का प्रयोग तब करें जब पात्र के अनुभव को प्रत्यक्ष रूप से दिखाना हो—जैसे किसी स्थान में प्रवेश, किसी व्यक्ति से सामना या किसी खतरे का अनुभव। कैमरे को आँखों की ऊँचाई पर रखें और फ्रेमिंग को प्राकृतिक रखें। गति और झटकों को नियंत्रित रखें ताकि दृश्य सहज लगे।
5. पॉइंटऑफ़व्यू एंगल के दोष (Demerits of Point of View angle shot)
इस एंगल का अत्यधिक प्रयोग दर्शक को थका सकता है और कहानी की निरंतरता तोड़ सकता है। यदि संदर्भ स्पष्ट न हो, तो दर्शक भ्रमित हो सकता है कि दृश्य किसके दृष्टिकोण से दिखाया जा रहा है। लंबे संवाद या सूचनात्मक दृश्यों के लिए यह एंगल उपयुक्त नहीं माना जाता।
6. निष्कर्ष (Point of View angle shot )
पॉइंट ऑफ़ व्यू (POV) एंगल एक शक्तिशाली कैमरा तकनीक है, जो दर्शक को कहानी के भीतर खींच लेती है और पात्र के अनुभव से जोड़ती है। सही संदर्भ, सीमित प्रयोग और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इसका उपयोग दृश्य को अत्यंत प्रभावी बनाता है, जबकि अति प्रयोग से दृश्य की स्पष्टता और संतुलन प्रभावित हो सकता है।
Tilt Movement of Camera What is close up shot ?