राजनीतिक संचार में एआई की बढ़ती भूमिका
एआई से बने विज्ञापन फैला रहे भ्रम-
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज राजनीतिक संचार का प्रभावशाली साधन बन गई है। राजनीतिक दल और उम्मीदवार इसका उपयोग भाषण तैयार करने, चुनावी विज्ञापन बनाने, मतदाताओं की रुचियों को समझने, सामाजिक माध्यमों पर संदेश प्रसारित करने तथा अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष प्रचार सामग्री बनाने में कर रहे हैं। एआई की सहायता से कम समय और लागत में चित्र, वीडियो, नारे और संदेश तैयार किए जा सकते हैं। इससे राजनीतिक प्रचार अधिक तेज, आकर्षक और लक्षित हुआ है। लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष भी सामने आ रहा है। एआई से बनाए गए नकली चित्र, आवाज और वीडियो मतदाताओं को भ्रमित कर सकते हैं तथा विरोधी उम्मीदवार की झूठी छवि प्रस्तुत कर सकते हैं। अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनावों में एआई से बने राजनीतिक विज्ञापनों का बढ़ता प्रयोग इसी चुनौती का प्रमुख उदाहरण है। इसलिए राजनीतिक संचार में एआई के प्रयोग के साथ पारदर्शिता, तथ्य-जाँच और नैतिक जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है।
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाए गए राजनीतिक विज्ञापनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इन विज्ञापनों में उम्मीदवारों की नकली तस्वीरें और वीडियो दिखाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कुछ वीडियो इतने वास्तविक दिखाई देते हैं कि सामान्य दर्शक उनके नकली होने का पता आसानी से नहीं लगा सकता। The Economic Times
विरोधियों की झूठी छवि
कई विज्ञापनों में एआई की सहायता से राजनीतिक उम्मीदवारों को ऐसी गतिविधियाँ करते हुए दिखाया गया है, जो उन्होंने वास्तव में कभी नहीं कीं। उदाहरण के लिए, एक विज्ञापन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद को अमेरिका और इजरायल विरोधी संदेशों वाले पत्तों के साथ खेलते हुए दिखाया गया। इसमें उनके परिवार की एक नकली तस्वीर भी बनाई गई थी। विज्ञापन बनाने वाली संस्था ने इस पर 92 हजार डॉलर से अधिक खर्च किए।
220 से अधिक एआई विज्ञापन
चुनावी विज्ञापनों पर नजर रखने वाली संस्था ‘वेस्लीयन मीडिया प्रोजेक्ट’ ने देशभर में कम-से-कम 220 ऐसे राजनीतिक विज्ञापन पहचाने हैं, जिन्हें पूरी तरह या आंशिक रूप से एआई की सहायता से बनाया गया। इन विज्ञापनों पर 13.7 करोड़ डॉलर से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इनमें 81 प्रतिशत विज्ञापन रिपब्लिकन उम्मीदवारों या उनसे जुड़े समूहों, 12 प्रतिशत डेमोक्रेटिक समूहों और शेष स्वतंत्र समूहों ने जारी किए। The Economic Times
अधिकतर विज्ञापनों पर सूचना नहीं
सबसे बड़ी समस्या यह है कि केवल 27 प्रतिशत एआई-निर्मित विज्ञापनों पर यह सूचना दी गई कि उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से बनाया गया है। अमेरिका में अभी ऐसा कोई संघीय नियम नहीं है, जो हर राजनीतिक विज्ञापन पर एआई के प्रयोग की जानकारी देना अनिवार्य बनाता हो। हालांकि, कुछ राज्यों ने इसके लिए अपने नियम बनाए हैं।
जनता को एआई विज्ञापन स्वीकार नहीं
एक सर्वेक्षण में 73 प्रतिशत लोगों ने राजनीतिक विज्ञापनों में एआई से बनी तस्वीरों और वीडियो के प्रयोग को अस्वीकार्य बताया। वहीं, 95 प्रतिशत लोगों ने कहा कि किसी विरोधी उम्मीदवार का ऐसा नकली वीडियो बनाना गलत है, जिसमें वह ऐसी बात कहता दिखाई दे, जो उसने वास्तव में कभी कही ही नहीं। The Economic Times
चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे विज्ञापन किसी उम्मीदवार के चयन को सीधे बदलने की अपेक्षा अपने समर्थकों को सक्रिय करने और चुनाव के लिए धन जुटाने में अधिक प्रभावशाली हो सकते हैं। फिर भी, नकली और वास्तविक सामग्री के बीच अंतर मिटने से चुनावी बहस, सूचना की विश्वसनीयता और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
सरल निष्कर्ष
यह समाचार बताता है कि एआई अब केवल रचनात्मक कार्य का साधन नहीं रहा। उसका उपयोग मतदाताओं को भ्रमित करने, विरोधी उम्मीदवारों की झूठी छवि बनाने और भावनाएँ भड़काने के लिए भी किया जा रहा है। इसलिए किसी भी राजनीतिक तस्वीर या वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसका स्रोत और सत्यता जाँचना आवश्यक है।

