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      Cable TV(Regulation) Act, 1995 केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995)

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      1 year ago
      in Media Study Material, UGC JRF NET Examination Preparation
      0


      Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995 (केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995) के सभी मुख्य बिंदु.

      1. अधिनियम का उद्देश्य

      इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य भारत में केबल टेलीविज़न नेटवर्क की गतिविधियों को नियंत्रित और नियमित करना था। 1990 के दशक में बिना नियंत्रण विदेशी चैनलों और आपत्तिजनक प्रसारणों की बाढ़ आ गई थी। इससे समाज और संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। इसलिए 1995 में यह अधिनियम पारित किया गया। इसका कानूनी आधार धारा 1 (Short Title, Extent and Commencement) में है, जिसमें बताया गया है कि यह पूरे भारत में लागू होगा और इसे 1995 से लागू माना जाएगा। Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995

      2. परिभाषाएँ (Section 2)

      अधिनियम की धारा 2 में आवश्यक परिभाषाएँ दी गई हैं। उदाहरण: “केबल ऑपरेटर” (Cable Operator) वह है जो कार्यक्रमों को जनता तक पहुँचाता है। “केबल टेलीविज़न नेटवर्क” का अर्थ है वह संपूर्ण प्रणाली जिसमें उपकरण और चैनल जुड़े हों। “अधिकृत अधिकारी” (Authorised Officer) वह है जिसे सरकार इस अधिनियम को लागू करने हेतु नियुक्त करती है। इन परिभाषाओं ने अधिनियम का दायरा स्पष्ट किया और सभी पक्षों की जिम्मेदारी तय की।

      3. पंजीकरण की आवश्यकता (Section 3)

      धारा 3 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति पंजीकरण (Registration) कराए बिना केबल टेलीविज़न नेटवर्क नहीं चला सकता। पंजीकरण के लिए आवेदन केंद्र सरकार के पास किया जाता है। बिना पंजीकरण नेटवर्क चलाना अपराध है। इसका उद्देश्य था कि सरकार के पास सभी ऑपरेटरों का रिकॉर्ड रहे और व्यवस्था अनुशासित ढंग से चले।

      4. प्रसारण सामग्री पर नियंत्रण (Section 5)

      धारा 5 के अनुसार कोई भी केबल ऑपरेटर ऐसा कार्यक्रम प्रसारित नहीं करेगा जो सरकार की अनुमति के बिना हो या जिसमें अश्लीलता, हिंसा, धार्मिक घृणा, राष्ट्र-विरोधी सामग्री हो। यह प्रावधान इसीलिए जोड़ा गया ताकि जनता को सुरक्षित और समाजोपयोगी सामग्री ही मिले। सरकार को अधिकार है कि वह आपत्तिजनक चैनलों या सामग्री को रोक सके।

      5. विज्ञापनों का नियमन (Section 6)

      धारा 6 में विज्ञापनों पर रोक और नियम तय किए गए। इसके तहत सभी विज्ञापन Advertising Code के अनुरूप होने चाहिए। भ्रामक, झूठे, अश्लील या स्वास्थ्य व समाज को नुकसान पहुँचाने वाले विज्ञापन प्रतिबंधित हैं। शराब, सिगरेट और अंधविश्वास बढ़ाने वाले विज्ञापन वर्जित हैं। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं और समाज की सुरक्षा के लिए बनाई गई।

      6. अधिकृत अधिकारी की शक्ति (Section 19)

      धारा 19 कहती है कि केंद्र या राज्य सरकार किसी भी क्षेत्र के लिए एक अधिकृत अधिकारी नियुक्त कर सकती है। इस अधिकारी को यह शक्ति है कि वह केबल नेटवर्क की जाँच कर सके, आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर उपकरण जब्त कर सके और प्रसारण बंद कर सके। इससे स्थानीय स्तर पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होता है।

      7. कार्यक्रम संहिता (Programme Code) (Section 5 & 6)

      कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का उल्लेख धारा 5 और 6 में है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम राष्ट्रविरोधी, अश्लील, जातीय या धार्मिक विद्वेष फैलाने वाले, या बच्चों के लिए हानिकारक नहीं होने चाहिए। सभी चैनलों के लिए यह अनिवार्य है। संहिता का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की रक्षा करना था।

      8. विज्ञापन संहिता (Advertising Code) (Section 6) Copyright Act

      धारा 6 विज्ञापनों पर भी लागू होती है। विज्ञापन संहिता में स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी विज्ञापन भ्रामक, झूठा, असभ्य या अंधविश्वास फैलाने वाला नहीं होगा। महिला, बच्चे और समाज के कमजोर वर्ग को अपमानित करने वाले विज्ञापन प्रतिबंधित हैं। जादू-टोना, झूठी दवाओं और यौन शक्ति बढ़ाने के उत्पादों के विज्ञापन भी वर्जित हैं।

      9. तकनीकी मानक (Section 9) Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995

      धारा 9 में कहा गया है कि सभी केबल टेलीविज़न नेटवर्क को सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इसमें उपकरणों की गुणवत्ता, सिग्नल की स्पष्टता और उचित फ्रीक्वेंसी का उपयोग शामिल है। उद्देश्य यह था कि दर्शकों को उच्च गुणवत्ता का प्रसारण मिले और रेडियो-टीवी तरंगों में बाधा न आए।

      10. फ्री-टू-एयर चैनल की उपलब्धता (Section 8)

      धारा 8 कहती है कि प्रत्येक केबल ऑपरेटर को सरकार द्वारा निर्धारित कुछ चैनलों का प्रसारण अनिवार्य रूप से करना होगा। विशेष रूप से दूरदर्शन के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनल मुफ्त दिखाने होंगे। इसका उद्देश्य यह था कि हर नागरिक को न्यूनतम स्तर पर समाचार, शिक्षा और संस्कृति संबंधी प्रसारण उपलब्ध हो।

      11. पंजीकरण की प्रक्रिया (Section 4)

      अधिनियम की धारा 4 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति केबल टेलीविज़न नेटवर्क चलाना चाहता है तो उसे केंद्र सरकार (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) से पंजीकरण कराना अनिवार्य है। आवेदन पत्र के साथ शुल्क जमा करना होता है। पंजीकरण की एक निश्चित अवधि होती है और समय-समय पर नवीनीकरण भी आवश्यक है। बिना पंजीकरण के नेटवर्क चलाना दंडनीय अपराध है। यह प्रावधान व्यवस्था लाने और अनधिकृत ऑपरेटरों पर रोक लगाने के लिए किया गया।

      12. पंजीकरण रद्द करना (Section 4A & 11)

      यदि कोई केबल ऑपरेटर अधिनियम की शर्तों का पालन नहीं करता, जैसे- प्रतिबंधित सामग्री दिखाना, तकनीकी मानकों का उल्लंघन करना, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। धारा 11 के तहत सरकार को यह शक्ति प्राप्त है। पंजीकरण रद्द होने पर वह व्यक्ति आगे नेटवर्क नहीं चला सकता। यह प्रावधान अनुशासन बनाए रखने और नियमों की गंभीरता सुनिश्चित करने के लिए था।

      13. अवैध चैनलों पर रोक (Section 5)

      अधिनियम की धारा 5 कहती है कि कोई भी केबल ऑपरेटर ऐसा चैनल प्रसारित नहीं करेगा जो सरकार की अनुमति के बिना हो। विशेष रूप से विदेशी चैनल, जिनके पास भारत में आधिकारिक अनुमति न हो, उन्हें प्रतिबंधित किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीय कानून व्यवस्था की रक्षा करना था।

      14. कार्यक्रम संहिता का पालन (Section 6)

      धारा 6 के अनुसार सभी ऑपरेटरों और चैनलों को Programme Code का पालन करना अनिवार्य है। इस कोड में कहा गया है कि प्रसारण न तो अश्लील हो, न हिंसक, न जातीय-धार्मिक विद्वेष फैलाने वाला। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि बच्चों के लिए सुरक्षित और शिक्षा-प्रेरित सामग्री उपलब्ध हो। उल्लंघन की स्थिति में ऑपरेटर पर कार्रवाई की जा सकती है।

      15. विज्ञापन संहिता का पालन (Section 6)

      उसी धारा 6 में विज्ञापनों के लिए Advertising Code भी जोड़ा गया है। इसमें भ्रामक, झूठे या अंधविश्वास फैलाने वाले विज्ञापनों पर रोक है। शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थों के प्रचार को प्रतिबंधित किया गया। इसके अलावा महिलाओं को वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने या बच्चों को अनुचित विज्ञापन दिखाने पर भी रोक लगाई गई।

      16. अधिकृत अधिकारी की शक्ति (Section 19)

      धारा 19 के तहत अधिकृत अधिकारी (Authorised Officer) को यह शक्ति दी गई है कि यदि कोई चैनल अधिनियम का उल्लंघन करता है तो वह तत्काल आदेश देकर प्रसारण बंद कर सकता है। वह उपकरण जब्त कर सकता है और नेटवर्क सील कर सकता है। अधिकारी के आदेश का पालन न करने पर कठोर दंड का प्रावधान है।

      17. जब्ती और जाँच (Section 20) Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995

      धारा 20 केंद्र सरकार को यह शक्ति देती है कि वह किसी भी कार्यक्रम या चैनल के प्रसारण पर रोक लगा सकती है यदि वह सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता या सुरक्षा के खिलाफ हो। इस धारा के अंतर्गत कई बार सरकार ने चैनलों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं। यह धारा राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

      18. दंड का प्रावधान (Section 16, 17)

      यदि कोई ऑपरेटर बिना पंजीकरण नेटवर्क चलाता है, या कार्यक्रम/विज्ञापन संहिता का उल्लंघन करता है, तो उसे कठोर दंड मिल सकता है। पहली गलती पर दो साल तक की सजा और 1,000 रुपये तक जुर्माना और बाद की गलती पर पाँच साल तक की सजा और 5,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कठोर दंड निवारक भूमिका निभाते हैं।

      19. संशोधन (Amendments)

      1995 से अब तक इस अधिनियम में कई संशोधन हुए। विशेष रूप से 2002, 2011 और 2021 में प्रमुख संशोधन किए गए। 2002 में CAS (Conditional Access System) लागू हुआ। 2011 में डिजिटल एड्रेसबल सिस्टम (DAS) अनिवार्य किया गया। 2021 में फिल्म प्रमाणन और आयु-आधारित वर्गीकरण (U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+) जोड़ा गया। इन संशोधनों का उद्देश्य अधिनियम को समय के साथ अद्यतन करना था।

      20. समग्र प्रभाव

      यह अधिनियम भारत में टेलीविज़न प्रसारण को अनुशासन और जिम्मेदारी से जोड़ता है। इसने सुनिश्चित किया कि हर ऑपरेटर सरकार के नियमों का पालन करे, जनता तक सुरक्षित और उचित सामग्री पहुँचे, और अवैध नेटवर्क या चैनल पर रोक लगे। साथ ही यह अधिनियम तकनीकी मानकों, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करता है। कुल मिलाकर, यह कानून भारतीय मीडिया नियमन का आधार स्तंभ बन चुका है।

       Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995 – प्रमुख संशोधन

      वर्षसंशोधन / अधिनियममुख्य बिंदु
      1995मूल अधिनियम (Cable Television Networks Regulation Act, 1995)केबल टीवी नेटवर्क को नियंत्रित करने के लिए लागू। पंजीकरण अनिवार्य, कार्यक्रम संहिता, विज्ञापन संहिता, अधिकृत अधिकारी की शक्तियाँ।
      2002संशोधन अधिनियम (Cable Television Networks Amendment Act, 2002)CAS (Conditional Access System) लागू किया गया। इसका उद्देश्य था कि ग्राहक अपनी पसंद के चैनल चुन सके और केवल उन्हीं के लिए भुगतान करे।
      2003अधिसूचना के माध्यम से लागूकुछ महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता) में CAS व्यवस्था अनिवार्य की गई।
      2011संशोधन अधिनियम (Cable Television Networks Amendment Act, 2011)Digital Addressable System (DAS) अनिवार्य किया गया। इससे हर चैनल का स्पष्ट रिकॉर्ड और बिलिंग संभव हुआ। पारदर्शिता बढ़ी और टैक्स चोरी पर रोक लगी।
      2012–2016चरणबद्ध लागूपूरे देश में DAS को चार चरणों में लागू किया गया – पहले महानगर, फिर बड़े शहर, फिर छोटे शहर और अंत में ग्रामीण क्षेत्र।
      2017TRAI नियमावलीचैनलों और पैकेजों के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) ने विस्तृत नियम लागू किए।
      2021संशोधन (Cinematograph और Cable Act से संबंधित सुधार)फिल्म और टीवी सामग्री के लिए आयु आधारित वर्गीकरण (U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+) लागू किया गया। OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी इसी तरह का रेगुलेशन लागू करने की दिशा में काम हुआ।
      2021 (जून)Cable TV Networks (Amendment) Rules, 2021शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal) की व्यवस्था की गई। अब प्रत्येक चैनल को Viewer Grievance Officer नियुक्त करना अनिवार्य हुआ।

      निष्कर्ष Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995

      • 1995: नियंत्रण की शुरुआत
      • 2002–03: CAS लागू
      • 2011–16: DAS अनिवार्य
      • 2017: पारदर्शी मूल्य निर्धारण
      • 2021: आयु-आधारित प्रमाणन + शिकायत निवारण

      Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995 – धाराएँ (Sections 1–23)

      धारा (Section)विषय (Provision)संक्षिप्त विवरण
      1संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभअधिनियम का नाम, पूरे भारत में विस्तार और 1995 से लागू होने का प्रावधान।
      2परिभाषाएँ“केबल ऑपरेटर”, “नेटवर्क”, “प्रसारण”, “अधिकृत अधिकारी” आदि की परिभाषाएँ।
      3पंजीकरण की अनिवार्यताबिना पंजीकरण कोई भी नेटवर्क नहीं चलाया जा सकता।
      4पंजीकरण की प्रक्रियापंजीकरण का आवेदन, शुल्क, नवीनीकरण आदि।
      4Aअनिवार्य चैनलों का प्रावधानसरकार द्वारा तय चैनलों को अनिवार्य रूप से दिखाना।
      5कार्यक्रम प्रसारण पर नियंत्रणकेवल स्वीकृत और संहिता के अनुरूप कार्यक्रम ही प्रसारित होंगे।
      6कार्यक्रम एवं विज्ञापन संहिताअश्लील, हिंसात्मक, राष्ट्रविरोधी और भ्रामक सामग्री पर रोक।
      7सामग्री का संचारणसरकार द्वारा नियमों के अनुरूप ही प्रसारण।
      8अनिवार्य चैनल (Must-Carry)दूरदर्शन और अन्य फ्री-टू-एयर चैनलों को मुफ्त में प्रसारित करना।
      9तकनीकी मानकसभी नेटवर्क को तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य।
      10केबल ऑपरेटर का दायित्वसरकार द्वारा तय शर्तों का पालन करना।
      11पंजीकरण रद्द करने का प्रावधानउल्लंघन होने पर पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
      12अधिकारियों की नियुक्तिअधिनियम को लागू करने हेतु अधिकारियों की नियुक्ति।
      13निरीक्षण का अधिकारअधिकारियों को नेटवर्क और प्रसारण की जाँच करने का अधिकार।
      14जानकारी प्राप्त करने की शक्तिअधिकारी ऑपरेटर से जरूरी जानकारी माँग सकता है।
      15जांच और जप्तीगलत सामग्री पाए जाने पर उपकरण जब्त किए जा सकते हैं।
      16दंड – प्रथम अपराध2 वर्ष तक कारावास और 1000 रुपये जुर्माना।
      17दंड – पुनरावृत्ति अपराध5 वर्ष तक कारावास और 5000 रुपये जुर्माना।
      18अपराध की प्रकृतिसभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और जमानती (Bailable)।
      19अधिकृत अधिकारी की शक्तिआदेश देकर प्रसारण रोकना, उपकरण जब्त करना।
      20केंद्र सरकार की शक्तिआपत्तिजनक चैनलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की शक्ति।
      21अपराधों की जांचअधिकारी द्वारा अपराधों की जांच और कार्यवाही।
      22नियम बनाने की शक्तिकेंद्र सरकार को नियम बनाने का अधिकार।
      23अधिनियम से उत्पन्न कठिनाइयों का निवारणकेंद्र सरकार को कठिनाइयों का समाधान करने की शक्ति।

      🔑 निष्कर्ष

      • धारा 1–4A → पंजीकरण और परिभाषाएँ
      • धारा 5–11 → सामग्री, संहिता और पंजीकरण रद्द
      • धारा 12–15 → अधिकारी और निरीक्षण
      • धारा 16–18 → दंड प्रावधान
      • धारा 19–23 → अधिकारी, केंद्र सरकार और नियम बनाने की शक्ति
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