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      Home Media Study Material

      Feature Article फीचर लेखन

      by Dr. Arvind Kumar Singh
      1 year ago
      in Media Study Material, Print Media
      0

      Feature Article फ़ीचर लेख -अर्थ, विशेषताएँ, महत्व, प्रकार और लेखन-कला

      1. फ़ीचर का अर्थ (Meaning of Feature)

      ‘फ़ीचर’ शब्द अंग्रेज़ी के “Feature” से लिया गया है, जिसका अर्थ है — किसी वस्तु या व्यक्ति की विशेषता, प्रमुखता या विशिष्ट पहलू। पत्रकारिता में “फ़ीचर” शब्द का प्रयोग उस लेखन-शैली के लिए किया जाता है, जो किसी विषय को गहराई से, विश्लेषणात्मक ढंग से और संवेदनशील दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।  सामान्य समाचार  और फ़ीचर में एक बड़ा अंतर है — समाचार केवल क्या हुआ, कब हुआ, कहाँ हुआ बताता है, जबकि फ़ीचर बताता है कि क्यों हुआ, कैसे हुआ और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ा। इस प्रकार, फ़ीचर पत्रकारिता का वह स्वरूप है जिसमें सूचनाओं को मानवीय दृष्टिकोण से रोचक, भावनात्मक और चित्रात्मक भाषा में प्रस्तुत किया जाता है। फ़ीचर का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं होता, बल्कि पाठक को सोचने, महसूस करने और प्रेरित होने का अवसर देना होता है।

      Feature Article उदाहरण के लिए —

      • “महिलाओं ने कैसे बदला पंचायतों का चेहरा”
      • “गाँव की मिट्टी से विश्व मंच तक – एक खिलाड़ी की कहानी”
      • “जब तकनीक बनी पर्यावरण की साथी”

      ये सभी विषय समाचार के रूप में भी लिखे जा सकते हैं, लेकिन जब इन्हें कहानी की शैली में संवेदनशील रूप से लिखा जाए तो ये फ़ीचर लेख कहलाते हैं। इस तरह कहा जा सकता है — “फ़ीचर वह सेतु है जो तथ्यों को भावनाओं से और समाज को उसके अनुभवों से जोड़ता है।”

      2. फ़ीचर की विशेषताएँ (Characteristics of Feature Article)

      फ़ीचर लेख को विशिष्ट बनाती हैं उसकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ। नीचे प्रत्येक को विस्तार से समझिए —

      (1) रचनात्मकता (Creativity)

      फ़ीचर लेखन पत्रकारिता और साहित्य का संगम है। इसमें लेखक तथ्यों के साथ अपनी कल्पना, भाषा की कलात्मकता और भावनात्मक शक्ति का उपयोग करता है। समाचार केवल ‘सूखा तथ्य’ होता है, जबकि फ़ीचर में ‘जीवंत चित्रण’ होता है।
      रचनात्मकता का अर्थ है — ऐसा लेखन जो विषय में नई दृष्टि, नया भाव या नया कोण प्रस्तुत करे। उदाहरण के लिए —
      “किसान की आँखों में बरसात का इंतज़ार” – यह एक साधारण घटना को भावनात्मक और कलात्मक रूप में दिखाता है।

      (2) मानवीय दृष्टिकोण (Human Angle)

      हर फ़ीचर का केंद्र मनुष्य होता है — उसकी भावनाएँ, चुनौतियाँ, संघर्ष और उपलब्धियाँ। जब कोई पत्रकार किसी भूकंप की रिपोर्ट लिखता है तो वह आँकड़े बताता है; लेकिन जब वही पत्रकार फ़ीचर लिखता है, तो वह बताता है — “एक माँ ने कैसे अपने बच्चे को मलबे से निकाला।” यही मानवीय कोण (Human Interest) पाठक को लेख से जोड़ता है।

      (3) गहराई और विस्तार (Depth and Detail)

      फ़ीचर किसी विषय की केवल सतह नहीं छूता, बल्कि उसकी जड़ तक पहुँचता है। इसमें लेखक पृष्ठभूमि, कारण, परिणाम, और भविष्य की दिशा का भी विश्लेषण करता है। यह “समाचार से गहरा और लेख से रोचक” होता है।

      (4) चित्रात्मक और भावनात्मक भाषा (Descriptive Language)- फ़ीचर की भाषा ऐसी होती है जो आँखों के सामने दृश्य खड़ा कर दे। लेखक केवल लिखता नहीं, चित्र बनाता है — शब्दों से। जैसे — “धूल उड़ा रहा था मैदान, बच्चे नंगे पाँव दौड़ रहे थे, और उनकी हँसी में पूरा गाँव मुस्कुरा रहा था।” यह दृश्यात्मकता ही फ़ीचर को साहित्यिक सौंदर्य देती है।

      (5) समसामयिकता और तथ्यनिष्ठा (Relevance & Authenticity)

      फ़ीचर का विषय समाज से जुड़ा, वर्तमान और प्रमाणिक होना चाहिए। कल्पना के साथ सत्य की सटीकता भी आवश्यक है।
      इसलिए फ़ीचर लेखक को शोध और तथ्य-जाँच पर उतना ही ध्यान देना चाहिए जितना रचनात्मकता पर।

      3. फ़ीचर का महत्व (Importance of Feature Writing)

      फ़ीचर लेखन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज-निर्माण का साधन भी है। इसका महत्व अनेक स्तरों पर देखा जा सकता है —

      (1) समाज को दिशा देना – फ़ीचर समाज के दर्द, आशा, परिवर्तन और नई सोच को उजागर करता है। यह किसी आंदोलन, नीति या जनसमस्या को मानवीय दृष्टि से सामने रखता है। जैसे — “बेटियों की शिक्षा में बदलाव” या “गाँवों में डिजिटल साक्षरता की लहर”। ऐसे लेख समाज में जागरूकता और सुधार की दिशा तय करते हैं।

      (2) मनोरंजन और शिक्षण (Infotainment) – फ़ीचर ज्ञान और मनोरंजन का संगम होता है। यह जानकारी देता है, पर उसी के साथ रोचकता और संवेदना भी बनाए रखता है। इसलिए इसे Infotainment Journalism कहा जाता है — अर्थात Information+Entertainment का समन्वय।

      (3) मानवीय संवेदनाओं को जागृत करना – कठोर आँकड़े कभी-कभी पाठक को प्रभावित नहीं करते, लेकिन जब उन्हीं आँकड़ों को किसी व्यक्ति की कहानी में पिरो दिया जाता है तो वह दिल को छू जाता है। यही संवेदनशीलता फ़ीचर को प्रभावी बनाती है।

      (4) अख़बार या पत्रिका की पहचान बनाना – किसी समाचार पत्र की लोकप्रियता केवल खबरों पर नहीं, बल्कि उसके साप्ताहिक या विशेष फ़ीचर पर भी निर्भर करती है। “रविवार मैगज़ीन” या “विशेष रिपोर्ट” कॉलम अक्सर पाठकों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं।

      (5) पाठक और समाज के बीच संवाद स्थापित करना – फ़ीचर वह माध्यम है जो जनता की भावनाओं को मीडिया तक पहुँचाता है और मीडिया के विचारों को जनता तक। इससे लोकतांत्रिक संवाद की प्रक्रिया मज़बूत होती है।

      (6) सांस्कृतिक अभिलेख (Cultural Record)

      फ़ीचर समय का जीवंत दस्तावेज़ होता है। इसमें समाज की संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपराएँ और परिवर्तन दर्ज रहते हैं, जो भविष्य के लिए ऐतिहासिक स्रोत बनते हैं।

      4. फ़ीचर के प्रकार (Kinds of Features)

      फ़ीचर लेख अनेक रूपों में लिखा जा सकता है। प्रत्येक प्रकार का उद्देश्य और शैली भिन्न होती है।

      (1) समाचार–आधारित फ़ीचर (News Feature)

      यह किसी प्रमुख समाचार या घटना के पीछे की कहानी बताता है। जहाँ समाचार घटना का सार देता है, वहीं फ़ीचर उसके परिणाम और मानव प्रभाव को दिखाता है।
      उदाहरण — “भूकंप के बाद पुनर्निर्माण की जद्दोजहद” या “बाढ़ में शिक्षा का संघर्ष”।

      (2) मानव–रुचि फ़ीचर (Human Interest Feature)

      ऐसे लेख जिनमें व्यक्ति की भावनाएँ, संघर्ष और प्रेरणा केंद्र में हों। उदाहरण — “एक रिक्शाचालक जिसने सैकड़ों गरीब बच्चों को पढ़ाया”। यह पाठक के मन में सहानुभूति और प्रेरणा दोनों पैदा करता है। Feature Article

      (3) यात्रा और जीवन–शैली फ़ीचर (Travel/Lifestyle Feature)

      किसी स्थान, संस्कृति या जीवनशैली का सुंदर चित्रण। उदाहरण — “राजस्थान की हवेलियों में रची परंपरा” या “उत्तराखंड के लोकगीतों में पहाड़ की आत्मा”।

      (4) ऐतिहासिक और सांस्कृतिक फ़ीचर (Historical & Cultural Feature)

      इतिहास की घटनाओं या सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में दिखाना। उदाहरण — “रामलीला से ओटीटी तक: भारतीय नाट्य परंपरा का विकास”।

      (5) वैज्ञानिक या शैक्षणिक फ़ीचर (Scientific/Educational Feature)

      नवीन तकनीकी और शैक्षणिक उपलब्धियों को सरल, रोचक शैली में प्रस्तुत करना।
      उदाहरण – “कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बदलती शिक्षा पद्धति”।

      (6) जीवनी फ़ीचर (Biographical Feature)

      किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन के प्रेरक पक्ष को रोचक शैली में प्रस्तुत करना।
      उदाहरण — “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: प्रेरणा के पंख”।

      (7) विचारात्मक या सामाजिक फ़ीचर (Opinion/Social Feature)

      समसामयिक सामाजिक, राजनीतिक या नैतिक विषयों पर विश्लेषण। उदाहरण — “सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी की सोच”। Feature Article

      5. फ़ीचर लेखन की कला (Art of Writing a Feature)

      फ़ीचर लेखन पत्रकारिता का सबसे सृजनात्मक भाग है। इसमें लेखक को न केवल तथ्यात्मक सटीकता बल्कि साहित्यिक प्रभाव भी उत्पन्न करना होता है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई बातें ध्यान में रखें —

      (1) विषय चयन की कला (Selection of Topic)

      सफल फ़ीचर की शुरुआत विषय से होती है। विषय ऐसा होना चाहिए जो समाज से जुड़ा हो, पर उस पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करे।  उदाहरण — “जलवायु परिवर्तन” पर साधारण रिपोर्ट नहीं, बल्कि “किसानों की फसलों पर जलवायु परिवर्तन का असर” विषय अधिक प्रभावी होगा।

      (2) तथ्य–संग्रह और शोध (Research & Background Study)

      फ़ीचर की विश्वसनीयता उसके शोध पर निर्भर करती है। लेखक को आँकड़े, विशेषज्ञों के विचार, वास्तविक उदाहरण और स्थल-अध्ययन करना चाहिए।

      (3) संरचना (Structure of Feature)

      फ़ीचर तीन भागों में विभाजित होता है —

      • प्रस्तावना (Introduction): आकर्षक शुरुआत जो जिज्ञासा जगाए।
      • मुख्य भाग (Body): तथ्यों, उद्धरणों और विवरणों के साथ विश्लेषण।
      • समापन (Conclusion): प्रेरक या सोचने योग्य अंत।

      (4) भाषा और शैली (Language & Style)

      भाषा संवादात्मक, चित्रात्मक और प्रवाहमयी होनी चाहिए। कठिन शब्दों और तकनीकी जार्गन से बचें। पाठक को लगे कि वह किसी कहानी को पढ़ रहा है।

      (5) आरंभ की कला (The Hook)

      पहली दो पंक्तियाँ फ़ीचर की जान होती हैं। इन्हीं से तय होता है कि पाठक आगे पढ़ेगा या नहीं। उदाहरण — “धूप से झुलसी धरती पर, एक बूढ़ा किसान आसमान की ओर देख मुस्कुरा रहा था — शायद बादलों को उसने अपना पुराना दोस्त मान लिया था।”

      (6) चित्रण, संवाद और उद्धरण (Descriptive Detail & Quotes)

      लेख में वास्तविकता लाने के लिए संवाद, साक्षात्कार या किसी पात्र का कथन जोड़ें। इससे लेख विश्वसनीय और जीवंत बनता है।

      (7) संतुलन और प्रभाव (Balance & Impact)

      फ़ीचर में भावनाएँ हों लेकिन अति-भावुकता नहीं। तथ्य हों लेकिन नीरसता नहीं। यही संतुलन फ़ीचर को प्रभावशाली बनाता है।

      6. फ़ीचर लेखन का उदाहरण (Illustrative Example) fake news

      विषय: “कचरे से करिश्मा – जब युवाओं ने बदला शहर का चेहरा”

      किसी शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर “क्लीन-ग्रीन मिशन” शुरू किया। उन्होंने कचरे से उपयोगी वस्तुएँ बनानी शुरू कीं — पुराने प्लास्टिक से ईंटें, रद्दी कागज़ से दीवार कला। धीरे-धीरे इस पहल ने पूरे शहर को प्रेरित किया। आज यह आंदोलन एक सामाजिक क्रांति बन चुका है। यह फ़ीचर न केवल सूचना देता है बल्कि पाठक को भी प्रेरित करता है कि छोटी कोशिशें बड़े बदलाव ला सकती हैं।

      7. निष्कर्ष (Conclusion) Feature Article

      फ़ीचर लेखन पत्रकारिता का वह पक्ष है जहाँ सत्य और संवेदना एक साथ चलते हैं। यह समाज की नब्ज़ को छूता है और पाठक के हृदय तक पहुँचता है। एक सफल फ़ीचर केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है।

      इसलिए कहा जाता है — “समाचार मस्तिष्क को जगाते हैं, और फ़ीचर हृदय को।”

      Feature Article Styles of News Presentation

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      Dr. Arvind Kumar Singh

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